
ये बातें मुझे किसी से भी पूछना नहीं पसंद था और कोई पूछता है तो मुझे बहुत बुरा भी लगता था और अगर मुझसे इस तरह के सवाल पूछे भी तो मैं भी गुस्सा होकर पूछ लेती थीं कि तुम कब कर रही हो ये सब और शादी वाले लोग पूछते हैं तो मैं बोल देती थी आप लोगों को ये सब करके क्या मिला है लेकिन मेरे आस - पास के सभी लोगों के यहीं सवाल रहते हैं और जब से आचार्य जी को सुनने लगी हु तब से ये सवाल और भी गलत लगने लगे हैं
















