
सभी को नमस्ते। सबसे पहले आभार - आचार्य जी का, मेरी प्यारी संस्था का और मेरे सभी गीता साथियों का। संस्था में आए मुझे 1 साल हो गया । आज आपको अपनी यात्रा के बारे में बताना चाहती हूँ - एक ऐसी यात्रा जिसमें गिरता-पड़ता व्यक्ति चलते-चलते उठकर चलता जा रहा है। 1. यात्रा की शुरुआत - गीता सत्रों से ढाई साल पहले गीता सत्रों से यह यात्रा शुरू हुई। वो पहला सेशन आज भी याद है, रात को 2:30 बजे तक अटेंड किया था। आँखें नम थीं, पता नहीं क्यों, पर लग…











































