
Ankit Yadav
वैसे एक ही पोस्ट में जितने संघर्ष हो सकते है ,सब है - चाहे घर से निकलना , बुक स्टॉल ज्वाइन करना ,वहां से रिजेक्शन , फिर संस्था में पहली बार का सिलेक्शन न होना फिर दूसरी बार सक्सेस ....अनु जी आपने क्या क्या और कैसे गुजारा होगा , ये पल मेरे लिए सोचना unbearable है ... कैसा होगा दिल सरफिरि का ❤️ ...चेहरे के तेज और मुस्कान के आगे सब छिप सा गया है, या हमारे पास वो आंखे नहीं है ...जो देख सके
















