नीलम जी, अज्ञानता से लड़ रही हूँ, यह आपने कहा, आचार्य जी से कहा। यह लड़ाई किसी और के सामने प्रमाण देने के लिए नहीं है, इसे यहाँ लिख देने से भी पूरी नहीं होती, यह तो हर दिन उस अज्ञानता को पकड़ने से चलती है। किस मोड़ पर, किस बात में वो अज्ञानता आज दिखी, वो देखा?