
अमीरों को देखता हूँ तो ख़ुद से नफ़रत होती है! || आचार्य प्रशांत (2024)
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पढ़ी लिखी बेरोज़गारी, और सरकारी नौकरी की तैयारी || आचार्य प्रशांत (2024)
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मौज का सूत्र: ‘मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता’ || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2023)
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बाबा साहेब अंबेडकर और हिन्दू धर्म || आचार्य प्रशांत (2024)
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दूसरों को हराना हो तो खुद को हराना सीखो || आचार्य प्रशांत (2024)
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ये रही प्रलय, ऐसे समाप्त होंगे हम || आचार्य प्रशांत (2024)
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देश दुर्दशा में है - भारत में रहूँ, या छोड़ दूँ? || आचार्य प्रशांत (2024)
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भगवान को बच्चा बना दो, और धर्म को खिलौना || आचार्य प्रशांत (2024)
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चालू लोगों के लिए (ठहाका विशेष) || आचार्य प्रशांत (2024)
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(गीता-48) अंधी कामना अधिक बुरी है, या अंधा त्याग? || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2024)
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जिन्हें भविष्य की चिंता ज़्यादा सताती हो || आचार्य प्रशांत (2024)
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तुम सुधर जाओ, फिर मैं आराम कर लूँगा || आचार्य प्रशांत (2024)
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नौकरी नहीं लग रही, पढ़ाई में मन नहीं, बहुत हीनभावना आ गई है || आचार्य प्रशांत (2024)
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मन मस्त हुआ || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2024)
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जिसको बदल ही जाना है, उससे उम्मीदें कैसी? || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2024)
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