
यह किताब सीधे-सीधे मांसाहार, हिंसा और इंसान की संवेदनहीनता पर सवाल उठाती है। नाम से ही साफ है कि यह कोई हल्की-फुल्की किताब नहीं है—यह आपको uncomfortable बनाती है। किताब की सबसे बड़ी ताकत है इसकी सीधी और तीखी भाषा। आचार्य प्रशांत यहाँ घुमा-फिराकर बात नहीं करते, बल्कि सीधे पूछते हैं— 👉 क्या हम सच में संवेदनशील हैं, या सिर्फ अपने स्वार्थ में जी रहे हैं? यह सिर्फ खाने की बात नहीं करती, बल्कि मानव मन ...

मैं आचार्य जी के वीडियो सुनने के बाद 2023 में ही दुग्ध पदार्थ छोड़ दिया था। जब दूध पदार्थ लेट भी था तब भी मुझे थोड़ा बहुत तथ्यों के बारे में पता था कि कैसे दुग्ध उत्पाद बाजार में आता है फिर भी तथ्यों को अनदेखा करके स्वाद के पुजारी होकर खा लेता था। इस पुस्तक में आचार्य जी ने आत्मज्ञान पर जोर दिया है। अगर तथ्य जानते भी हो तो उससे ज्यादा फलप्रद नहीं होता है असली प्रेम और करुणा तो आत्म ज्ञान से ही आत...

जाका गला तुम क़ाटिहो पुस्तक, से मेरा अवलोकन ✍️ सब पहले, मैं इस किताब को ⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️रेटिंग देना चाहूँगी । जाका गला तुम काटिहो पुस्तक पढ़ने के बाद मेरे अंदर सचमुच की करुणा जागी। मांसाहार छोड़े तो पंद्रह साल बीत चुके। पर कोई करुणा नहीं थी, पर इस पुस्तक ने मेरी आँखें खोल दी। बहुत सारी जानकारियाँ जो मुझे पता ही नहीं थी, इस पुस्तक को पढ़ने के बाद पता चलीं। हिंसा क्या है, अपने ही प्रति हिंसा है मांसाहा...

ये पुस्तक हमारी तथाकथित मान्यता की गाय हमारी माता है ,इसलिए हम उनका दूध पी सकते हैं । या पशु हमारे उपभोग के लिए हैं ,इसका पूरे तथ्यों के साथ खंडन करती है । आज की स्थिति में करुण शाकाहार अपनाना हर मनुष्य के लिए आवश्यक है , इससे आप अपने द्वारा हो रही हिंसा को तो कम करेंगे ही ,साथ ही आप अपने आप को भी क्लाइमेट चेंज की मार से बचा सकते हो । जो हम किसी जानवर के साथ करते है, वही हम अपने के साथ भी करत...

मैं इस किताब को पढ़ने से पहले ही मांसाहार छोड़ चुकी थी, लेकिन बात बस मांसाहार छोड़ने की नहीं है।जब मैं यह किताब पढ़ी तो मुझे समझ में आया कि शाकाहार तभी सार्थक है जब वह आत्मज्ञान से फलित हो अगर वह संस्कार से आ रहा है तो वह शाकाहार बड़ा व्यर्थ है, जब हम किसी बकरी के बच्चे को मारते है तो हम अपने बच्चों की प्रति प्रेम पूर्ण नहीं रह सकते हैं ।यह बिल्कुल हो ही नहीं सकता अगर हम एक बकरी के बच्चे के प्रति ...

यह किताब सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं है—यह एक ऐसा दर्पण है जो आपको अपने आप को, अपनी पसंद को, और अपने आसपास की दुनिया को एक नई नजर से देखने के लिए मजबूर करता है, जो थोड़ा परेशान करने वाला भी है और मुक्त करने वाला भी। मैंने इसे तब उठाया जब मैं खुद को खोया हुआ महसूस कर रहा था, रोजमर्रा की जिंदगी के उथल-पुथल में फंसा हुआ, और कुछ सवालों से जूझ रहा था—खासकर यह कि हिंसा क्या है? मेरे पास इसकी कोई स्पष्टत...