सिर्फ जुबान के स्वाद के खातिर कितने मासूम बेजुबान जानवर को हम खा जाने है, हम उन्हें थोड़ा खाना खिला के उनकी आजादी छीन लेते, खुद को उनसे अलग जानना की अज्ञान है पाप है, असली जानवर तो हम है