“क्या तुम्हारा भोजन किसी की हत्या से तैयार हुआ है?”
यह किताब हमें क्रूरता के प्रति सामूहिक संवेदनहीनता पर विचार करने को मजबूर करती है। जब कोई जीव मरता है, तो केवल उसका शरीर नहीं, उसकी ऊर्जा, कम्पन और करुणा का संसार भी मरता है। और वह ऊर्जा, वह कंपन, इस धरती के पर्यावरण को छूता है।