इस किताब को पढ़ने के बाद अगर आप जरा भी संवेदनशील है तो मांसाहार अपने आप छूट जायेगा, मेरा तो छूट गया और अगर धरती को बचाना है तो मांसाहार से दूर जाना ही पड़ेगा