
THE BOOK HELPED ME TO KNOW WHAT IS GOING WITHIN THIS SKIN AND HOW THE I IS NOT AUTHENTIC BUT COLLECTION OF EVOLUTION SOCIETY AND RANDOMNESS BUT THIS CAN BE SURPASSED BY KNOWING THE SELF. BEST BOOK ACTUALLY ILLUMINATING ONE....MUST READ FOR THE REMOVAL OF INNER CLUTTER...
I am blessed to have read Vedant - the most valuable spiritual creation i have read ever! Vedant beautifully describes the Mann, Aham, Aatma, Sansar, Dharma. This has the most profound explanation in practical way to understand the main mahavakyas selected from Upanishads, which enlightened my being just by reading it! While reading I felt this book was about me and got myself prepared for lookin...

वेदांत” एक बेहद गहरी और जीवन को बदल देने वाली पुस्तक है, जो हमें अपने वास्तविक स्वरूप को समझने की दिशा में ले जाती है। यह केवल दार्शनिक ज्ञान नहीं देती, बल्कि जीवन के मूल प्रश्नों का सीधा सामना कराती है। इस किताब को पढ़ते हुए मुझे यह समझ आया कि हम अक्सर बाहरी चीजों में सुख खोजते रहते हैं, जबकि असली संतोष और स्पष्टता भीतर से आती है। वेदांत के सिद्धांतों को लेखक ने बहुत सरल और व्यावहारिक तरीके से सम...

आचार्य जी की वेदांत पुस्तक पढ़कर मैंने अनेक तथ्य और अवधारणाएँ समझने का प्रयास किया है। मेरी जितनी समझ और ग्रहणशीलता है, उसके अनुसार मैंने वेदांत के कुछ मूल सिद्धांतों को जाना और समझा है। जैसे मन क्या है,चेतना क्या है,वृत्ति क्या होती है,उपनिषद क्यों पढ़े जाते हैं, हम वास्तव में क्या हैं,पुरुष क्या है,प्रकृति क्या है,माया क्या है,आत्मा क्या है, ब्रह्म क्या है,मोक्ष क्या है। इसके साथ ही, उपनिषदों के...

This book helped me understand words that have very deep meanings but are often used in a very shallow way. To understand the Upanishads and the Gita, this is a must-read book. It works like a key to a lock. Many profound and subtle ideas have been explained in very simple language.

🌺 शहीदी दिवस — गुरु तेग़ बहादुर जी को नमन 🌺 🕯️ आज शहीदी दिवस है। सिखों के नवें गुरु, गुरु तेग़ बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों की सहायता के क्रम में 24 नवंबर को शहादत स्वीकार की। उन्हें हिन्द दी चादर कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने सभी धर्मों की रक्षा की। 🌼 आचार्य जी का उपहार 🌼 आज आचार्य जी हमें सही युद्ध सीखा रहे, सही जिंदगी सीखा रहे। और आचार्...
I FOUND OUT THIS बन्धन चाहोगे, बन्धन मिलेगा; मुक्ति चाहोगे, मुक्ति मिलेगी। मन की इच्छा, झुकाव, कामना ही सबकुछ तय करती है। ‘यथा दृष्टि, तथा सृष्टि’ – जैसा मन का दृष्टिकोण, वैसा ही जीवन। अध्यात्म इसलिए है ताकि वर्तमान कष्टों से मुक्ति पाई जा सके। शुभ कर्म वर्तमान स्थिति सुधारने के लिए करो, न कि भविष्य या अगले जन्म के लिए। लोग कहते हैं आत्मा-परमात्मा finite (सीमित) होनी चाहिए, पर वो infinite (अ...

गीता एक आग है, जो आप को पकड़ लेगी तो छोड़ेगी नहीं, अभी तक लगता है की मन है ,अहम है , कहने का मतलब, फल है, कर्म है, और कर्ता है , फल पर मेरा अधिकार नही है,ये समझ में आया था, फिर गीता अंदर तक थोड़ी गई तो पता चला की कर्म पर भी तुम्हारा अधिकार नही, फिर थोड़ी और अंदर गई तो, पता चला की कर्ता को देखो, और लगा की करने वाला कोई है ,और जब गीता और अंदर तक गुश गई, तो पता की करने वाला ही कोई नहीं है, सब प्राक...

मन, चेतना, वृत्ति, प्रकृति, अहं, आत्मा, माया, ब्रह्म और मोक्ष को एक दम सरल तरीके से, बिल्कुल व्यवहारिक तल पर समझने के लिए बहुत उपयोगी रही यह किताब मेरे लिए, अभी मैंने सिर्फ दो बार ही पढ़ी है। वेदांत को बहुत ही सरल माध्यम से समझाया है आचार्य जी ने इसमें ।

वेदांत सनातन धर्म का सबसे मुख्य दर्शन है। इस दर्शन को समझने के लिए अगर सबसे पहले कोई किताब आपको पढ़ने चाहिए तो वो ये है। यह किताब बहुत ही सरल भाषा में, वास्तविक जीवन के उदाहरण से हमे वेदांत की महत्ता को समझा देती है। यह ये भी बताती है कि वेदांत हमारे व्यावहारिक जीवन से किस तरह जुड़ा हुआ है और आज के समय में हमारे लिए कितना ज्यादा जरूरी है। सनातन धर्म को समझना है तो यह किताब आपके लिए सबसे ज्यादा ज...

"वेदांत भारतीय दर्शन में सर्वोच्च स्थान पर होने के बावजूद, इसके संदर्भ में बहुत कम स्पष्टता थी। इस पुस्तक के माध्यम से वेदांत का मर्म और महत्व समझने को मिला। जीवन की उच्चतम संभावनाओं को लेखक ने बहुत ही सरल भाषा में समझाया है। यह पुस्तक सभी को एक बार अवश्य पढ़नी चाहिए।"

यह किताब वेदांत के उत्कृष्टम मर्म को हमारे सामने रखता है। ऋषियों की उत्कृष्टम चेतना से उठे ज्ञान का प्रतीक है वेदांत।आप वेदांत को कही से भी पढ़े परन्तु आचार्य प्रशांत द्वारा संकलित यह वेदांत बहुत ही व्यवहारिक है। हालांकि वेदांत बहुत ऊंची चेतना से निकला है परंतु यह किताब आपको आपकी चेतना के के तल पर समझने की कोशिश करता है।

काफी लंबे समय से वेदांत जैसे शब्द ही सुन रखे थे लेकिन इस किताब को पढ़ने के बाद पूरी तरह से स्पष्टता आ गई। आचार्य प्रशांत जी का धन्यवाद करना चाहूंगा उन्होंने इतने सरल माध्यम से वो सारी बात समझा दी जिसको आम जनमानस के बीच अलग अलग तथाकथित धर्मगुरूओं द्वारा सिर्फ जलेबियां बनाई जाती हैं।

यह पुस्तक उन लोगों के लिए बहुत ही उपयोगी है जो उपनिषदों और वेदांत के बारे में जानना चाहते हैं और अपने जीवन में इसके सिद्धांतों को लागू करना चाहते हैं। आचार्य जी की यह पुस्तक उपनिषदों के ज्ञान को बहुत ही सरल और समझने योग्य तरीके से प्रस्तुत करती है।

वेदांत = वेद(ज्ञान) + अंत(उच्चतर/शिखर) , अध्यात्म= अधि (अधिक जानना) + आत्म (खुद को) After Reading this book , you will suggest these - 1) सभी के लिए अपरिहार्य पुस्तक 2) अध्यात्म की शुरुआत, इस पुस्तक से करें 3) आप धन्यवाद देते नही थकेंगे , आचार्य जी को , कि उन्होने इतनी सरल भाषा रखी इस पुस्तक की ।