I FOUND OUT THIS बन्धन चाहोगे, बन्धन मिलेगा; मुक्ति चाहोगे, मुक्ति मिलेगी। मन की इच्छा, झुकाव, कामना ही सबकुछ तय करती है। ‘यथा दृष्टि, तथा सृष्टि’ – जैसा मन का दृष्टिकोण, वैसा ही जीवन। अध्यात्म इसलिए है ताकि वर्तमान कष्टों से मुक्ति पाई जा सके। शुभ कर्म वर्तमान स्थिति सुधारने के लिए करो, न कि भविष्य या अगले जन्म के लिए। लोग कहते हैं आत्मा-परमात्मा finite (सीमित) होनी चाहिए, पर वो infinite (अ...