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Paperback Details
HindiLanguage
244Print Length
Description
आत्म-जिज्ञासा के अभाव में मनुष्य अपना सबसे कीमती संसाधन, अपना जीवन ही खोता चलता है। चिन्ता कर-करके कुछ हासिल भी कर लिया तो ये कभी नहीं समझ पाता कि जो हासिल किया उसकी कीमत क्या, और वह हासिल करने के लिए जो गँवाया, उसकी कीमत क्या! यही कारण है कि सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में आत्म-जिज्ञासा को सबसे ऊँचा स्थान दिया गया है।
जिसे हम सनातन धर्म कहते हैं वह वेदों में अभिव्यक्त होता है, और वेदों के उत्कृष्ट शिखर को ही वेदान्त कहा जाता है। वेदों के ज्ञानकाण्ड के अंतर्गत आता है वेदान्त, जिसमें मात्र आत्म-जिज्ञासा को प्रधानता दी गयी है। प्रश्नों की एक लम्बी श्रृंखला वेदान्त में आकर अंतर्मुखी हो जाती है। और यह कहना गलत नहीं होगा कि उपनिषद् ही वेदान्त हैं, वेदों का शिखर हैं।
इस पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत वेदान्त के मूल सिद्धांतों को समझाते हैं और प्रमुख उपनिषद् सूत्रों में छुपे गूढ़ रहस्यों को सरलता के साथ उजागर करते हैं। यह पुस्तक एक भेंट है उनके लिए जो अपनी आध्यात्मिक यात्रा में थोड़ा आगे बढ़ चुके हैं, साथ-ही-साथ उनके लिए भी जिन्होंने अपनी यात्रा बस अभी शुरू ही की है।
अगर आपको भारतीय दर्शन को गहराई से और बिल्कुल शुरुआत से समझना है, तो यह किताब सबसे बेहतरीन है। इसके साथ ही, इसमें आपको यह भी पता चलेगा कि कैसे वेद आगे बढ़े और उन्होंने अपनी परिपक्वता को कैसे प्राप्त किया। आखिर वेद बनाए ही क्यों गए? 90% लोग वेदों से दूर क्यों भागते हैं और क्यों बहुत ही कम लोग ऐसे हुए जिन्हें वेदों के बारे में गहराई से पता है।
अगर आप सोचते हैं कि आप थोड़े या ज्यादा लॉजिकल हैं, तो यह क...
Abhishek kumar
12d
Highest potential of life
This book and thier writer really changed my life of living .
dilip makwana
13d
Mukti
कलियुग के श्री कृष्ण हो प्रभु आप.......🥲🥲
Shraddha Vaishnav
2mo
HAM APNE AAP SE MILTE HAI ISE PADHNE KE BAD
BAHUT ACHI HAI DIMAG KHUL JATI HAI PADH KE
Laxmi narayan
2mo
वेदान्त हमे प्रश्न पूछना , आपने आप को जाने मैं सहायक है । वास्तविक धर्म के बारे बताता है
बहुत ही शानदार पुस्तक है , मैंने पड़ी आपको भी पड़ कर पता चलेगा ।