
काफी लंबे समय से वेदांत जैसे शब्द ही सुन रखे थे लेकिन इस किताब को पढ़ने के बाद पूरी तरह से स्पष्टता आ गई। आचार्य प्रशांत जी का धन्यवाद करना चाहूंगा उन्होंने इतने सरल माध्यम से वो सारी बात समझा दी जिसको आम जनमानस के बीच अलग अलग तथाकथित धर्मगुरूओं द्वारा सिर्फ जलेबियां बनाई जाती हैं।