
मन, चेतना, वृत्ति, प्रकृति, अहं, आत्मा, माया, ब्रह्म और मोक्ष को एक दम सरल तरीके से, बिल्कुल व्यवहारिक तल पर समझने के लिए बहुत उपयोगी रही यह किताब मेरे लिए, अभी मैंने सिर्फ दो बार ही पढ़ी है। वेदांत को बहुत ही सरल माध्यम से समझाया है आचार्य जी ने इसमें ।