
इस पुस्तक को पढ़ने से पहले मैं शिव को मुख्यतः उस रूप में जानती थी, जिसमें उन्हें प्रलय या विध्वंस के देवता के रूप में देखा जाता है। लेकिन मैंने कभी सच में यह प्रश्न नहीं किया था कि प्रलय का वास्तविक अर्थ क्या है। आखिर किस चीज़ का विध्वंस या विघटन होना है? शिव जिस ‘टूटने’ या ‘समाप्त होने’ का प्रतीक हैं, वह वास्तव में क्या है? ये ऐसे प्रश्न थे जिन्हें मैंने कभी खुद से पूछने की कोशिश ही नहीं की। बहु...

📖 शिवोऽहम् — एक ऐसी पुस्तक जिसने शिव जी की मेरी पूरी छवि बदल दी इस पुस्तक को पढ़ने से पहले शिव की मेरे भीतर एक बिल्कुल अलग छवि बनी हुई थी—शिव यानी पार्वती जी के पति, गणेश जी के पिता, कैलाश पर्वत पर रहने वाले एक देवता… शिव को लेकर ऐसी ही कई मान्यताएँ और धारणाएँ थीं। लेकिन शिवोऽहम् पढ़ते हुए एक-एक करके ये सारी छवियाँ और मान्यताएँ टूटती गईं। शिव को किसी व्यक्ति, रूप या पौराणिक चरित्र की तरह देखने के...

शिव की इतनी स्पष्ट, सरल व्याख्या और गहरी अर्थ और हमारे जीवन में महत्व इस पुस्तक में आचार्य जी ने समझाया है। इंसान की जो जड़ है, इंसान का जो केंद्र बिंदु है, उसकी तरफ़ इशारा करने के लिए ‘शिव’ शब्द की रचना हुई। शिव कोई व्यक्ति थोड़े ही हैं। वो कोई ऐसी इकाई नहीं हैं जो अपना कोई निजी, पृथक या विशिष्ट व्यक्तित्व रखती हो। जो समय के पार हो, उसे समय के किसी बिंदु पर अवस्थित नहीं करते।

हमने शिव को जटाधारी, त्रिशूलधारी, कैलाश पर बैठे एक देवता के रूप में देखा है। लेकिन पुस्तक प्रश्न उठाती है—शिव वास्तव में कौन हैं? पुस्तक बताती है कि शिव कोई बाहर बैठी हुई सत्ता नहीं, बल्कि वह सत्य और बोध हैं जहाँ अहंकार और 'मैं' की सीमित पहचान समाप्त हो जाती है। मेरे लिए शिवोहम् बुक की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह शिव को मंदिर से उठाकर जीवन के बीच में ले आती है। शिव के प्रतीकों और कथाओं के माध्य...

शिवोहम" अद्वैत दर्शन और शिवत्व के वास्तविक अर्थ को समझाने वाली एक अद्भुत पुस्तक है। ऋभु गीता और अवधूत गीता जैसे महान अद्वैत ग्रंथों का निचोड़ हो या फिर महाशिवरात्रि, सावन, कांवड़, शिवलिंग और माँ पार्वती से जुड़े पर्वों-प्रतीकों का वास्तविक अर्थ—इस पुस्तक में वेदांत के सबसे ऊँचे दर्शन को बहुत ही सरल और सहज भाषा में पिरोया गया है। बड़ी-बड़ी और कठिन पुस्तकों के इस संक्षिप्त सार को आम जनमानस बहुत ...

शिवोहम” एक बेहद गहरी और आत्मचिंतन कराने वाली किताब है, जिसने मुझे “मैं कौन हूँ?” इस प्रश्न पर गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित किया। किताब में शिव को किसी देवता के रूप में नहीं, बल्कि एक चेतना और अवस्था के रूप में समझाया गया है। यह दृष्टिकोण मेरे लिए बिल्कुल नया था और इसने मेरी सोच को एक अलग दिशा दी। मुझे खास तौर पर यह बात बहुत प्रभावित करती है कि हम अपने शरीर, मन और विचारों से परे भी कुछ हैं, और उ...

"आपकी उच्चतम संभावना का नाम शिव है" आचार्य जी इस पुस्तक में आपको निर्वांशतकं, ऋभुगिता, अवधूत गीता, महामृत्युंजय मंत्र, संत लल्लेश्वरी, अक्का महादेवी के दोहों के माध्यम से असली शिव से और शिवत्व से भेंट कराते हैं। ये 142 पन्नों की प्यारी यात्रा, न केवल बोधमय है बल्कि आचार्य जी के व्यंग्यों, उनके प्रेम और उनकी स्पष्टता से भरी है। शिव भक्त कौन? तीर्थ माने क्या? जानवरों पर क्रूरता और शिवभक्ति का पाख...

Thank you Acharya ji for Unveiling the True Essence of Lord Shiv This book by Acharya Prashant Ji delves deep into the real spiritual meaning of Lord Shiva, far beyond popular ritualistic worship. The author explains that Shiva, in his symbolic and sagun (form-based) representation, is not merely an idol to be worshipped for worldly gains, but a powerful reminder of spiritual awakening and inner ...