
"आपकी उच्चतम संभावना का नाम शिव है" आचार्य जी इस पुस्तक में आपको निर्वांशतकं, ऋभुगिता, अवधूत गीता, महामृत्युंजय मंत्र, संत लल्लेश्वरी, अक्का महादेवी के दोहों के माध्यम से असली शिव से और शिवत्व से भेंट कराते हैं। ये 142 पन्नों की प्यारी यात्रा, न केवल बोधमय है बल्कि आचार्य जी के व्यंग्यों, उनके प्रेम और उनकी स्पष्टता से भरी है। शिव भक्त कौन? तीर्थ माने क्या? जानवरों पर क्रूरता और शिवभक्ति का पाख...