
शिवोहम” एक बेहद गहरी और आत्मचिंतन कराने वाली किताब है, जिसने मुझे “मैं कौन हूँ?” इस प्रश्न पर गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित किया। किताब में शिव को किसी देवता के रूप में नहीं, बल्कि एक चेतना और अवस्था के रूप में समझाया गया है। यह दृष्टिकोण मेरे लिए बिल्कुल नया था और इसने मेरी सोच को एक अलग दिशा दी। मुझे खास तौर पर यह बात बहुत प्रभावित करती है कि हम अपने शरीर, मन और विचारों से परे भी कुछ हैं, और उ...