
इससे पहले शिव और शिवत्व का इतना गहरा अर्थ कभी नहीं सुना था। जब तक शिवलिंग का महत्व नहीं पता था तो पूजा में भी कोई रुचि नहीं थी। इस किताब को पढ़ते हुए बहुत सी चीजें सीखने को मिली और सबसे बड़ी बात जो गलत सुन रखी थी वो पता चली। सभी को ये किताब जरूर पढ़नी चाहिए। 😊

प्रीति जी, जिस पूजा में पहले रुचि ही नहीं थी, उसी में अब अर्थ दिखने लगा है, यह अपने आप में बड़ी बात है। जो गलत सुना था वो पहचान में आया, यही तो असली पढ़ाई है, किताब पूरी हो जाने के बाद भी यह देखते रहना बाकी है कि रोज़ की ज़िंदगी में शिवत्व का वो अर्थ कहाँ काम आता है। आचार्य जी के सत्रों में यह देखना और गहरा होता जाएगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें।