


हनुमान चालीसा का वेदान्तिक अर्थ” एक ऐसी किताब है जो पारंपरिक पाठ को सिर्फ दोहराने के बजाय उसे समझने की दिशा में ले जाने की कोशिश करती है। इस किताब की सबसे खास बात यह है कि यह हनुमान चालीसा को केवल धार्मिक पाठ नहीं मानती, बल्कि उसे एक गहरे आंतरिक अर्थ से जोड़ती है। इसमें बताया गया है कि चालीसा के शब्द सिर्फ पूजा के लिए नहीं हैं, बल्कि जीवन को समझने का माध्यम भी हैं। मुझे इसमें यह अच्छा लगा कि यह bl...

कोट्स - [ हनुमान चालीसा का वेदान्तिक अर्थ ] पुस्तक सेआप अगर समझना चाहते हो कि हनुमान चालीसा में क्या कहा जा रहा है तो उससे पहले आपको समझना पड़ेगा कि हनुमान के आराध्य श्रीराम कौन हैं। हनुमान, जो हमेशा राम के सामने विनीत रहते हैं, झुके रहते हैं, कौन हुए? ऐसी चेतना जो हमेशा सिर्फ़-और-सिर्फ़ सत्य की ओर देख रही है, उसको कहते हैं हनुमान।।

यह पुस्तक पढ़ने के पश्चात मैंने क्या सीखा, वो साझा कर रहा है ताकि अन्य लोगों को पता चले क्यों यह पुस्तक बहुत महत्वपूर्ण है पढ़ना। पुस्तक से मिली सीख :- हनुमान जी = सत्यमुखी चेतना राम = आत्मा/ सत्य/ ब्रह्मा 1. भक्ति का असली अर्थ – हनुमानजी की भक्ति केवल किसी वरदान या कृपा के लिए नहीं, बल्कि अहंकार का शमन और आत्मा के परम सत्य से जुड़ने की साधना है। 2. हनुमान का प्रतीकात्मक रूप – ( सत्यमुखी चे...
It helped to understand the chant beyond the normal interpretation .. like Bhoot Pisach nikat nahi aave... so far , for me it was literal meaning ie no evil spirit will hover around me if I chant Hanuman Chalisa, while the book gives a whole new dimension to this verses, how it was relevant for the people during medeival times to bring them close to Vendant. Clearly Vedant is missing in the curr...

Achrya ji ko sunne aur ye pushtak pdhne ke baad mene ram ji aur Hanuman ji ka vastavik me hae kaun ye jana shurwt se bs hm unko structure hi mnte ae lkn is pustak se asli arth smjh pae hanuman chalisa hm chote se pdhte ae lkn kbhi arth jnne ka pryas nh kia or mammi papa se pucho to bs khte te chalisa pdho Hanuman ji wishes puri krdege lkn kbhi ka arth smjhne ki koshish b nhi ki ek doha shurwat se ...

Through Acharya ji, I started re-reading texts usually used in lok dharma without knowing their true meanings, like chalisa and sunderkand. Next time when you read chalisa, use this a key to understand symbolism or rather deeper aspects across chalisa.

इस किताब को पढ़कर पहली बार मैने जाना कि हनुमान जी सदैव राम जी की तरफ मुंह क्यों किए रहते हैं? चूंकि राम का वेदान्तिक अर्थ सत्य, बोध और आत्म है। इसलिए हनुमान जी सत्य मुखी हैं अर्थात जो सदैव सत्य के साथ हो वह हनुमान है। ऐसे ही अनेक वेदान्तिक अर्थ पता चले इस छोटी मगर गूढ़ किताब में।

हनुमान चालीस का पाठ तो सुनती आयी थी घर में लेकिन आचार्य जी के इस पुस्तक से मुझे हनुमान किसका प्रतीक है हमारे जीवन में हनुमान चालीसा की क्या महत्व है ये मुझे पता चला ।

मैंने जब आचार्य जी के Youtube Channel पर "हनुमान चालीसा का वास्तविक अर्थ" शीर्षक से वीडियो देखा, मैं एकदम Shock हो गया। क्यूंकि अब तक जिस हनुमान चालीसा को मैंने पढ़ा था, उसको मैंने इस अर्थ से कभी समझने की कोशिश नहीं की। हनुमान जी को मैंने बाहर किसी अन्य के रूप में भजा था अब वो मुझे मेरे भीतर नजर आने लगे। मैं स्वयं को उन हनुमान जैसा बनाने की कोशिश करने लगा हूँ, जिन्होंने राम की सेवा में अपना सम्पूर्...

हनुमान जी स्वयं ज्ञान के प्रतीक हैं। जो ज्ञान के प्रतीक हैं, आप उनकी चालीसा पढ़ोगे बिना ज्ञान के तो उनको अच्छा लगेगा? जो स्वयं ज्ञान के प्रतीक हैं, आप उन्हीं का वृत्त पढ़ रहे हो पर बिना ज्ञान के, बिना समझे, बिना वेदान्त के हनुमान चालीसा पढ़ रहे हो; हनुमान जी को भी कुछ यह बात जँचेगी नहीं। वो भी यही चाहते हैं कि ज्ञान की आँखों से उनको देखो।

आज यह किताब पढ़ी। हनुमान चालीसा का वही अर्थ जानती थी जो आम जन मानस में प्रचलित है, पर वेदांत के प्रकाश में और आचार्य जी की वज़ह से इसका वास्तविक अर्थ समझ पायी हूँ। => राम कौन हैं? राम ब्रह्म परमारथ रूपा। अविगत अलख अनादि अनूपा।। सकल विकार रहित गतभेदा। कहि नित नेति निरूपहिं वेदा।। => हनुमान जी किसके प्रतीक हैं? आत्मा मुखी अहंकार या राममुखी। => जब मन में अपनी स्वार्थ सिद्धि के विचार ...

जब कभी भी हनुमान चालीसा का पाठ होता तो मैं इसे बस बेवकूफी ही समझता था क्योंकि लोग बिना समझे हनुमान चालीसा की चौपाई को दोहराए जा रहे थे। जब मैं ने इसका वेदांटिक अर्थ समझा तो हनुमान के प्रति मेरे दिन में एक गहरा सामान बैठ गया फिर मैं समझ पाया की क्यों हनुमान जी ने साहसी और देश निश्चायी हो पाए क्योंकि उनके दिल में राम थे। उनके बुद्धि को सही संचालक मिल गए उनके बुद्धि को अहंकार संचालित नहीं करता उनके ब...