
इस किताब को पढ़कर पहली बार मैने जाना कि हनुमान जी सदैव राम जी की तरफ मुंह क्यों किए रहते हैं? चूंकि राम का वेदान्तिक अर्थ सत्य, बोध और आत्म है। इसलिए हनुमान जी सत्य मुखी हैं अर्थात जो सदैव सत्य के साथ हो वह हनुमान है। ऐसे ही अनेक वेदान्तिक अर्थ पता चले इस छोटी मगर गूढ़ किताब में।