
हनुमान जी स्वयं ज्ञान के प्रतीक हैं। जो ज्ञान के प्रतीक हैं, आप उनकी चालीसा पढ़ोगे बिना ज्ञान के तो उनको अच्छा लगेगा? जो स्वयं ज्ञान के प्रतीक हैं, आप उन्हीं का वृत्त पढ़ रहे हो पर बिना ज्ञान के, बिना समझे, बिना वेदान्त के हनुमान चालीसा पढ़ रहे हो; हनुमान जी को भी कुछ यह बात जँचेगी नहीं। वो भी यही चाहते हैं कि ज्ञान की आँखों से उनको देखो।