
आज यह किताब पढ़ी। हनुमान चालीसा का वही अर्थ जानती थी जो आम जन मानस में प्रचलित है, पर वेदांत के प्रकाश में और आचार्य जी की वज़ह से इसका वास्तविक अर्थ समझ पायी हूँ। => राम कौन हैं? राम ब्रह्म परमारथ रूपा। अविगत अलख अनादि अनूपा।। सकल विकार रहित गतभेदा। कहि नित नेति निरूपहिं वेदा।। => हनुमान जी किसके प्रतीक हैं? आत्मा मुखी अहंकार या राममुखी। => जब मन में अपनी स्वार्थ सिद्धि के विचार ...