
जब कभी भी हनुमान चालीसा का पाठ होता तो मैं इसे बस बेवकूफी ही समझता था क्योंकि लोग बिना समझे हनुमान चालीसा की चौपाई को दोहराए जा रहे थे। जब मैं ने इसका वेदांटिक अर्थ समझा तो हनुमान के प्रति मेरे दिन में एक गहरा सामान बैठ गया फिर मैं समझ पाया की क्यों हनुमान जी ने साहसी और देश निश्चायी हो पाए क्योंकि उनके दिल में राम थे। उनके बुद्धि को सही संचालक मिल गए उनके बुद्धि को अहंकार संचालित नहीं करता उनके ब...