✍🏻 पोस्ट 26 | 16 अगस्त '26
💭 विषय — लोकधर्म────────📝 फोर्स फीडिंग: लेब्लौह की प्रथा
🎯 एक माँ अपनी 5 वर्ष की बेटी को रोज़ 16,000 कैलोरी जबरन खिलाती है, इनकार करने पर उसकी उंगली दो टहनियों के बीच दबा देती है। वह इसे यातना नहीं, प्रेम कहती है, क्योंकि उसकी नज़र में मोटा शरीर ही बेटी की शादी की गारंटी है।
📌 मॉरिटानिया में सदियों पुरानी प्रथा "लेब्लौह" इसी सोच पर टिकी है, कुछ स्रोत इसे 11वीं सदी तक ले जाते हैं। वहाँ स्थूल शरीर सुंदरता…
Aaj bhi hmare samaj me ladki ko ek Saman ki trh hi dekha jata h . Maa Bap , samaj , privar ki bate Mano to hm ek achchi ladki h itna force Kiya jata h hme ki hm khud ko hi Dosi manne lagta h bs kuchh aur Kah nhi sakte khna to bhut chahte h.
Manisha Chaudhary
सर यहां बस काम महत्व है
Priya Pant
मैं भी अपनी बेटी के वजन का बहुत ख्याल रखती हूं वह 7 साल की है उसका वेट 25kg होना चाहिए था पर उसका वजन 21kg है।
अभी गर्मियों की छुट्टी में वह अपनी दादी के वहां गई थी वहां उसका वेट 18kg हो गया था।
लेकिन मैं ऐसा इसलिए करती हूं जिससे उसकी ग्रोथ अच्छे से हो अच्छा न्यूट्रिशन मिले उसको, जिससे उसकी पढ़ाई लिखाई में कोई दिक्कत ना हो।
क्योंकि वह अपने स्कूल में खेल कूद, डांस, एक्सरसाइज आदि में भाग लेती है। जिसके लिए शरीर में जान होनी चाहिए।
इसलिए मुझे उसके खान-पान का ख्याल रखना होता है।
Akash kumar
लेब्लौह में बेटी को मोटा किया जाता था ताकि शादी हो जाए…
और हम कहते हैं कि जमाना बदल गया है। 😂
वहाँ लड़की के शरीर को शादी की गारंटी बनाने के लिए जबरन खिलाया जाता था, यहाँ भी मामला बहुत अलग नहीं है—बस तरीका मॉडर्न हो गया है।
अब रिश्ता आए तो पिज्जा, बर्गर, पेटीज और कोक का इतिहास भी साथ आता है।
कोक भी ऐसी कि ऊपर से लिखा है—“शुगर फ्री डाइट”… मतलब अपराध वही है, बस पैकेजिंग हेल्थ कॉन्शियस वाली है। 😂
फिर वजन बढ़ता है, पिंपल निकलते हैं, शरीर हमेशा डिहाइड्रेटेड रहता है…
लेकिन इलाज?
मेकअप! 😂
घर से निकलना हो या न हो, लिपना-पोतना चालू।
चेहरे पर पिंपल हैं तो मेकअप, थकान है तो मेकअप, ग्लो नहीं है तो मेकअप—
ऐसा लगता है शरीर से ज्यादा चेहरे की सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने की चिंता है।
और फिर मैं सोचता हूँ—
मेरी दुल्हन आखिर मिलेगी कहाँ?
एक तरफ वो समाज है जहाँ लड़की को मोटा करके शादी योग्य बनाया जाता था,
दूसरी तरफ हमारा आधुनिक समाज है जहाँ लड़की को जंक फूड, कॉस्मेटिक्स और दिखावे के बीच ऐसा ढाला जा रहा है कि शरीर भी परेशान और मन भी।
मुझे तो अब ऐसी दुल्हन चाहिए जो पिज्जा देखकर खुश तो हो,
लेकिन रोज का भोजन उसे पिज्जा न लगे;
कोक पीए तो शौक से, पानी पीना न भूले;
मेकअप करे तो करे, लेकिन बिना मेकअप आईने में खुद को देखकर भी परेशान न हो।
क्योंकि समस्या मोटे या पतले शरीर की नहीं है।
समस्या तब शुरू होती है जब किसी इंसान का शरीर उसकी कीमत, सुंदरता या शादी की गारंटी बन जाता है।
लेब्लौह में शरीर पर समाज का दबाव था,
हमारे यहाँ शरीर पर बाजार और दिखावे का दबाव है।
बस जंजीर बदल गई है, शरीर पर अधिकार जमाने की आदत अभी भी बची हुई है। 😂
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Lovely Singh
सब जगह यही चल रहा है, बस तरीके अलग-अलग है।
Uma
ye sb to Aaj v dekhne ko milta h gao ya khi v dekho to sb aakrshak hi bnna chahte h
mai v phle ye sb sochti thi lekin jb se Aacharya ji ko suni hu tb se ye sb mere andar se dhire dhire khtm ho rha h ... thank you Aacharya ji 🙏🙏
Nikita Chaturvedi
आज तो हमारे समाज में ये हाल है कि लड़के पैसे बले होने चाहिए और लड़की आकर्षक हो।
fuleshwari Sahu
हम लोग अभी भी झेल रहे है कि कोई पतली लड़कियों कुपोषित दिखती है उस पतली इंसानों को रिश्तेदार भी हीन
भावना से देखते है
Laxmi Prajapti
यह मैंने भी महसूस किया है ।
पहले मैं मेकअप करती तथा झूमके और महंगे कपड़ों का भी शोक था।
लेकिन मैने जब से आचार्य जी को सुनना शुरू किया तब से मैने यह सब छोड़ दिया और अब मेकअप नहीं सुबह morning walk पर जाती हूं।
घर में सब बोलते है क्या जरूरत है यह सब करने की लेकिन मुझे पता है कि जरूरत है।
मुझे अपने शरीर को सुंदर नहीं मजबूत बनाना है।
धन्यवाद आचार्य जी ❤️
Kanchan Gond
ये चीज मैंने भी झेला है अपनी कद को लेकर, छोटा कद होने के कारण मुझे भी घर, पड़ोस और रिश्तेदारों से यही सुनने को मिलता था कि इसकी शादी कैसे होगी, अपाहिज़ बाप है दहेज बहुत लगेगा कैसे देगा।
जबकि मैं इण्टर के बाद ही private school में teaching कराती थीलेकिन मेरा कौशल किसी को नहीं दिखता था।
अब मेरी सादी हो गई है पति की उम्र मुझसे ज्यादा है पर उनकी सोच मुझे लेकर काफी सकारात्मक है मेरी पढ़ाई, मेरे कौशल को हमेशा ऊंचाई देने की कोशिश करते है मैं खुश हूं कि मुझे एक अच्छा जीवन साथी मिला है लेकिन ससुराल वाले व रिश्तेदारों की ये बात बूरी लगती है कि मेरे पति सबके खिलाफ जाकर भी मेरे जीवन मेरे कौशल को प्राथमिकता क्यूं दे रहे है।😊✍️📚🎯
kailash kumar
❓ सवाल किसी दूर के देश का नहीं है। कहाँ मैं भी अपने शरीर या अपनी छवि को इसलिए ढो रहा हूँ क्योंकि भीतर अधूरापन ही बैठा है? देखना भर काफ़ी नहीं, उस देखने के साथ नीयत भी चाहिए। दिशा वहीं से बदलती है।
➡️ इस अधूरेपन को तो मैं 16-17 साल से ही देख रहा हूं। और थोड़ा बहुत अब भी अपने शरीर से चिपका हुआ हूं। चेहरे पर थोड़ा भी दाग आ जाए या पिंपल आ जाए तो मैं तनाव में आ जाता था। मगर एक क्लास साथी था मेरा जो ना ढंग का कपड़ा पहना था ना जिसका ढंग का चेहरा था फिर भी वह बिंदास रहता था, लेकिन एक बार तो साझा थी कि दोनों के पास समझदारी नहीं थी। और शरीर की बात को दिमाग पर रखते रखते शरीर भी ढंग का नहीं रहा और समय भी निकल गया कुछ हासिल भी नहीं हुआ।
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Ishika sharma
ये आज भी लड़की सुंदर हो गोरा हो तभी शादी के लिए फिट है और उसकी शादी जल्दी हो जाती है जो लड़की सांवली होती उनकी शादी देरी से होती है ऐसा आज भी भारत देश में होता है। इसलिए अपने आप को सुंदर बनाओ ताकि शादी हो सके बस यही देख जाता है। और जो लड़की सुंदर होती है वो सब के नज़र में ज्यादा आकर्षक बनी रहती और सब उसे अच्छे कहते हैं। जो रंग में कम रही उसे उतना बोलते भी नहीं ऊपर से वो मोटी हो गई तो और बेकार हो गई कहते है अब इससे शादी कौन करेगा इतनी मोटी ये तो भैंस दिखती है। इस तरह से लड़की के आकार, रंग और रूप देख के लड़की का मूल्यांकन करते हैं।
KAJAL NIRALA
हर तरीके से महिलाओ को ही प्रताड़ित किया जाता रहा है कही पतले होना कही मोटा होना
बस प्रत्येक ज्ञान शरीर से शुरू होकर शरीर पर ही खत्म होते है 😰😰
और लड़की साथ ही समाज़ को लगता हैं कि वाह घर समाज़ हमारी कितनी परवाह करता है 🤡🤡🤡
Disha Rajgor
इसलिए मोटा शरीर पूरे परिवार की इज़्ज़त का विषय बन जाता है।
ये बात मुझे उस बात से संलग्न लग रही है कि, अगर लड़का और ज्यादातर लड़की अगर अच्छी दिखती है जिसमें गोरा पन और मोटा पन हो तो हम कहते है कि ये खाते पीते घर की है या अच्छे घर की 🤔
Gayatri
ऐसा भी होता है क्या पहली बार पता चला है इसका 🙏🙏
T
Tanu Pandey
whenever people see me,they start by saying,"you look like you haven't eaten" or "The food has eaten you up". Then the conversation starts you have to take care of your body, you are too thin. After that, parents start saying,"work more and eat more."
Similarly, there are instances where individual alter their lifestyle, for example adopting a non-vegetarian diet , under pressure from a partner who expresses concern.
Ego manifests itself in various forms - disguised as care, health consciousness, marital love however, the underlying motive in each case remains the same .
The pursuit of self gratification by the ego.
Neha
हमारे देश में भी ये देखने को बहुत मिलता है,अगर लड़की पतली हैं तो उसे भी शादी के समय Reject कर दिया जाता है यह कहकर कि लड़की तो कमजोर है शरीर में जान ही नहीं है।
मोटी लड़कियों को ज्यादा पसंद करते हैं, कहते हैं कि ये खाते - पीते घर की है।
Raj Kumar Sidar
मैंने भी दुबलापन झेला है इसलिए मैंने भी एक वक्त में पौष्टिक आहार के पीछे भागता था। अब तो हमारे घर के एक छोटा बच्चा जो शारीरिक रूप से कमजोर है उसको लेकर कई लोग सलाह देने लग जाते हैं। मैं कहता हूं उसका अपना दिन आएगा तो जान जाएगा, क्या खाना है। अभी कौन सा उसे ओलंपिक में जाना है?
अब तो मैं भांप जाता हूं तो पहले ही बोल देता हूं, उसके बारे में कुछ मत बोलना।
Govind
ऐसी ऐसी प्रथा के बारे में पता चल रहा है जिनकी मैने कल्पना भी नहीं की थी।
Seema
Meri beti bhi 1 kilo 600 gram ki thi Lekin Maine apni beti ko Aisa Khel Rahi iron calcium yah kuchh nahin Diya sirf Jo aahar bacchon Ke liye rahata Hai vahi khilaya pilaya lekin abhi bhi log bolate Hain beti ki hight theek nahin Hai Meri beti 11 ki hai ab uski hight badhane ko protein powder do kahin Hai kuchh Aisa karke do Mera manana Hai waqt Ke Sath sab kuchh sahi ho jata hai bacche ki hight health sab aata hai lekin Samaj ke najriye mein bacche bhi kuchh nahin Beti Hai to sabse jyada kuchh nahin
Swamiraj Jadhav
Now when you say it , how actually it happens , now I know I have become obsessed behind figuring out best routine possible for me in gym , and I am doing it for long time now , watching videos , scientific facts , changing the made schedule multiple times , even I wasted my study time in it .
And behind doing gym , I have found myself having 2 motives , one is to seek validation and gratification from others and other reason is also that I like to do workout and challenge myself with harder workouts.
And the even the second part has spiritual clothes worn , i used to do extreme exercise to prove myself , and I had done it in excess and got injured , but now I do exercises as per my body and it's recovery and now as I observe it I make a bit changes ,like if th le body is not recovered i reduce the intensity rather than pushing excessively.
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Priyanka yadav
हमारे समाज मे महिलाए अपनी बेटियों को पुरुष के नजरिये से देखती है ।
Ganesh Kumar
😈Mai ahanka..
ahankar ka prapanch..
ahankar hamesha kuch n kuch pakadna chahta hai chahe wo apni beti ho wa koi aur mul baat hai ki wo apne ko ghatana nhi jata jaye kisi bhi avastha me ho jaha ho sake khud ko bachana bnaye rakhna . chahe dabbu ban ke ya uthtu banke ..
khud ko badalna nhi chahta khud ko samajh ki najaro me dekhna aur khud ka astitva bna lena....
dhong karna...
ahankar khud ko bachane ke liye dusre ko kya khud ko bhi ( mane sharir) maar sakta hai.
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Khushi
dekh to mai bhi rhi hu pr meri bhi niyat nhi bn pa rhi hai aap ko sun ke jitni sahsh himmat bhitar se hoti hai wo hamari niyat me nhi dikh pati hai Krna to bahut kuchh chahte hai pr kr nhi pate
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Sneh lata
इस विषय पर मै अपनी छोटी बेटी के बारे में बताती हूं। मेरी छोटी बेटी 8 महीने की हुई थी ।वह कमजोर थी, उसके सर में बीच से दोनों हिस्से बिल्कुल अलग से लग रहे थे ।एक हिस्सा आगे और दूसरा थोड़ा पीछे था। कुछ लोग कहने लगे कि इस पर थोड़ा ध्यान दो लड़की है शादी होने में दिक्कत हो जाएगी अब सोचो कि कुछ दिन की बच्ची और हमेशा शरीर में कितने ही परिवर्तन होते हैं अभी से शादी की चिंता लोगों को होने लगी उसको पीलिया भी हो गया था । मैंने कभी उस पर कोई ध्यान ही नहीं दिया।बस उसको सामान्य तरीके से पाला । और वह आज बिल्कुल सही है । मैंने तो उसके लिए कुछ भी विशेष नहीं किया ।वो पढ़ने में कमजोर थी।मगर वो सब खुद मैनेज कर लेती है। और वो बड़ी वाली से ज्यादा एक्टिव भी है । वही मेरे साथ दिल्ली गयी थी।हम जितना भी अब समझ पा रहे हैं । लड़की का जीवन सिर्फ शादी करके बच्चे करना बस। गज़ब है मानव जाति।
jiten beniwal
🪔🪔
देखना भर काफ़ी नहीं, उस देखने के साथ नीयत भी चाहिए।
दिशा वहीं से बदलती है।
Hansa j Kevadiya
हम कितना ही कोशिश करते हैं लेकिन कुछ भी घटित होता है तो सबसे पहले अहंकार आत्मरक्षण की ही सोचता है।
हां आत्मज्ञान हो तो हम इसमें आत्म अवलोकन करके इसमें गौर जरूर सकते हैं, हमें दिख तो जाता है, कि यह अहम खुद को बचाने में लगा है ।
पर हमने जो आदतें बना ली है, सालों से तो सबसे पहले तो हम खुद (अहम )की सुरक्षा करने में ही लग जाते है।
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Priya
Han 💯✅
lokdharm ke chalte log pta Nahi kya kya karte hai hamare yahan bhi ye bahut HOTA hai log samaj parivar risto Mai bhi manytaye jyada Dekhi hai Maine pahle ham bhi samil ho Jate the in SAB Mai lakin ab chahkar bhi Nahi ho pate kyunki koi bahana bacha hi Nahi jiski bajah SE hame Kuch bhi Bina soche samjhe koi bhi Kam Karna pade kyunki samjh chuke hai Kisi bhi baat ko manna hai ya Nahi ye hamari niyat par depend HOTA hai isiliye koshish karte hai hamari niyat hamesha saaf or sachchi rakhe 🧐🤔
❤️🙏
Ram Suhawan Patel
मेरे साथ भी होता है बच्चे को पढ़ाई के लिए, अधिकांश बार मै अपनी पहचान के लिए ही उसको पढ़ने के लिए जोर देता हूँ।
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AVADHESH KUMAR
ये बेटों के साथ भी होता है। गांव जाता हूं तो मम्मी ही तय करती है कि मेरा पेट भरा या नहीं। अब उतना नहीं करती, पर ये गांवों में और मांओं में खूब रहता है कि ठूंस कर खिलाओ।
जब सही शिक्षा मिलती है इंसान को तो ये धारणा टूट जाती है उसके भीतर से कि बहुत सारा खाना है। अब वो स्वास्थ्य के अनुसार खाती और खिलाती है, धारणा अनुसार नहीं।
✍🏻 पोस्ट 26 | 16 अगस्त '26 💭 विषय — लोकधर्म ──────── 📝 फोर्स फीडिंग: लेब्लौह की प्रथा 🎯…