
✍🏻 पोस्ट 2 | 29 अगस्त '26 💭 विषय — विश्व दर्शन ────────── 🎭 “मेरे पास कोई विकल्प नहीं था। मैं मजबूर था” 💁 कभी यह सच होता है। लेकिन कभी-कभी यही वाक्य हमें एक और असहज संभावना से बचाता है : क्या मैं सचमुच मजबूर था, या अपनी ही पहचान के पीछे छिप रहा था? 🧠 फ्रांसीसी दार्शनिक ज्याँ-पॉल सार्त्र ने इस समस्या को Bad Faith (mauvaise foi) के नाम से समझाया। 📖 अपनी किताब बीइंग एंड नथिंगनेस (1943) में सार्त्र एक कैफ़े के वेटर का उदाहरण देते है…








































