
Shriram Singh
❓और जब मैं कहता हूँ “मैं ऐसा ही हूँ।” क्या मैं अपने बारे में कुछ देख रहा हूँ, या कुछ देखने से बच रहा हूँ? 🐒 यह बात एक तरह से निर्णय करना सही नहीं हो सकता है यह तो कहने वाले पर निर्भर करता है कि उसकी नियति क्या है लेकिन ज्यादातर अहंकार की चाल यही होती है कि वह मान्यता भरम संस्कार संस्कृति पर चलता है और उसको उस पर चलने में सुरक्षा और बढ़ावा मिलतीहै। 🐒 जब कोई कहता है कि मैं तो ऐसा ही हूं इसे तुरंत वह अपनी जिम्मेदारी, स्वयं को देखने,सोच विचार करने…















