✍🏻 पोस्ट 11 | 27 जुलाई '26
💭 विषय — अर्थशास्त्र / व्यापार──────────
🎯 क्या आर्थिक रूप से निर्भर व्यक्ति सचमुच स्वतंत्र हो सकता है?
👏 हम अक्सर महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं।
❓️लेकिन सम्मान का अर्थ क्या है?
❓️क्या केवल सुरक्षा देना, निर्णय लेना और खर्च उठाना ही सम्मान है?
💥 या फिर ऐसा जीवन देना, जहाँ वह अपने निर्णय स्वयं ले सके?
📊 भारत में महिलाओं की श्रम भागीदारी 2022 के 33.9% से बढ़कर 2025 में 40% हो गई है। यह एक सकारात्मक बदला…
महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्म निर्भर होना ही उसे सम्मान का पात्र बनाती है, यह कहना भी गलत है कई बार पुरुष तो पुरुष है महिला भी सम्मान नहीं करती हैं l
काम कर के भी सुनना पड़ता हैं l
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Govind
स्त्री को स्वतंत्रता एवं अधिकार मिलने चाहिए,नहीं तो उनका जीवन किसी न किसी के नियंत्रण में ही रहेगा।
यदि स्त्री की आर्थिक स्वतंत्रता असहज लग रही है तो हम उसकी स्वतंत्रता और उसके अधिकार छीन रहे है,उसे नियंत्रण में कर रहे है।
Komal Singh
ye example to maine apne ghar me dekha hai ,,,aur mai unko samjhne ke liye sochi bhi ho par har baar ruk gai q ki mai abhi khud financial condition se bahar aur .week ho sirf study karti ho aur ghar ka kaam ...to mai apne ke logo nhi bol paati lekin ha har baar feel hua hai ki hamara samaj aaj bhi vahi hai ,, jo chhata hai ki aaurte ghar me rhe ... nirbhar bani rhi aavaj nhi utaa paaye khana banaye baccho ki care kare bass itni hi simit ki purosho ne mahilao ki life
Srishti
Outstanding, Just reminded me of Rani Lakshmi Bai.👏🏻👏🏻
Anuradha
mujhe lagata hai kewal financial freedom hi kafi nhi hota hai .Mahilaon ko unke tarike se jeene dena yanh bhi Ati aavashyak hota hai .
Maine apne ghar me dekha hai meri Maa ek Government teacher hai wo financial to independent hai pr 99% wo mere pitaji ke uper depend hai ..To ek Independent woman ho jaana yanh nhi Darshata ki wah mahila sabhi bandhano se Mukt hai .
Agar samaj ko mahilaon ko Sach me Samman dena hai to wah use Chetana ke star pr mukt kr de , mahila ko khud ke hisab se chalane ke liye chhod de fir Hume mahilaon ke liye kisi suraksha kisi vyavastha ki awasyakata nhi padegi.
women me fir khud apni rah banane ki shakti utpanna ho jayegi fir kisi bhi samaj ko uska fikr karne ki jarurat nhi hogi bs
Women ko Azad sochane aur Jeene diya jaye ....🙏🙏🙏🙏
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neelam Digrase
❓️या हमारा सम्मान वहीं तक सीमित है, जहाँ तक उनका जीवन हमारे नियंत्रण में बना रहे?
हा बात स्त्री की जाए तो वो किसी भी संबंध में रहे पिता, पति ,भाई , ओर भी अन्य संबंध ले सकते है उसका जीवन सम्मान में रह रहे तब तक ही रहता है जब तक वो उनके नियत्रण में बनी रहती है । सिर्फ महिला का ही नहीं आज के दौर में पुरुषों की बात की जाए तो अगर वो कोई काम नहीं कर रहे है या बेरोजगार है तो उन्हें भी सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता है । महिलाओं की अपेक्षा कम हो सकता है । लेकिन उनका जीवन भी महिलाओं के ज्यादा नियंत्रण में नहीं लेकिन दबाव में रहता है । ❓ यदि किसी स्त्री की आर्थिक स्वतंत्रता आपको असहज करती है, तो क्या आप वास्तव में उसका सम्मान करते हैं... या केवल उस पर अपना अधिकार बनाए रखना चाहते हैं?
यदि कोई स्त्री की आर्थिक स्वतंत्रता है भी तब उसको सम्मान जितना मिलना चाहिए उससे कम ही मिलता है और उस पर अधिकार ज्यादा रखा जाता है ।
Kriti
बिल्कुल, इन लोकधर्मों की दुनिया में जहां तक हमारे जीवन के ऊपर उनका नियंत्रण है सम्मान भी वही तक सीमित है।
और हमारे अंदर वो आग, वो लौ होनी चाहिए जो इस झूठे सम्मान को नकार पाने का साहस रखता हो।
Reeta Gautam
सम्मान सिर्फ शब्द है स्त्री के लिए वास्तविकता नहीं, चाहे कितना भी बड़ा सामाजिक स्टेटस हो ।
आत्म ज्ञान के बिना प्रेम असंभव है
प्रेम तो आचार्य जी कर रहे हैं बाकी सब शोषण है ।
Manikant shukla
एक स्त्री को हम घर की चार दीवारी में रखना, सुरक्षा का सूचक मानते है। सच्चाई कुछ और है चूंकि हम लिंग आधारित पहचान रखते है तो महिला एक दूसरा लिंग है और उस पर किस का कब्जा होगा, ये मेरे द्वारा तय किया जाएगा, ये अहंकार का सूचक है।
स्त्री को आजादी ना देना, बताता है कि हम कितने गुलाम है। जब हम गुलाम होते है तो ही हम दूसरों को गुलाम रखते है, अन्यथा एक आजाद व्यक्ति किसी को गुलाम नहीं रखेगी।
मैंने अक्सर गावों में देखा है कि वहाँ लड़की और लड़का के बीच बहुत अधिक भेद रखा जाता है। जिस कारण वहाँ एक लिंग दूसरे लिंग को विशेष समझने लगता है और उसका ध्यान फिर उसको नोचने खसोटने पर रहता है। यह सोचकर कि इसमें कुछ खास है।
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Isha Karwasra
As a well educated doctor, I clearly see that despite earning well, while I can independently spend money in a lot of ways including travelling alone to foreign destinations, but there still is some dependence on major financial decisions. I never took interest in understanding financial planning and investment. I have always simply let my father or my husband take those decisions without realising that this comes from our social conditioning. I see it very clearly in my life.
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Rishank Verma
isme dhakad kya he unko extra efforts krna pd rha he.
ANKIT SHAW
i just remember RANI LAXMIBAI image in my class 5 history book.
the kid was tied on her back riding horse..
And today this...
JYOTSNARANI SINGH
Powerfull message hai har paristhithi mein jo karna hai use koi rok nahi sakta , karna hai to baas karna hai .
Seema JAITLY new
स्त्री केवल शरीर नहीं है। वह चेतना, जिज्ञासा और संभावनाओं का स्रोत है। यदि उसकी चेतना को केवल एक सामाजिक भूमिका तक सीमित कर दिया जाए, तो नुकसान जितना स्त्री का होता है उससे कहीं ज्यादा पूरे समाज और राष्ट्र का होता है।
Garima
मैंने बहुत करीब से देखा है कि अगर महिला financially independent है और उसके पैसे उसके husband से ज्यादा है तो husband भी हर बात को घुमा - फिराकर अधिक पैसे कमाने का ताना देना शुरू कर देता है चाहे वह कितनी भी छोटी से छोटी बात क्यों न हो, लगभग पुरुषों से बर्दाश्त ही नहीं होती financially independent women, इसीलिए वो चाहते है कि जितनी गवार रहेगी उतनी ही त्याग की मूर्ति रहेगी और उतना ज्यादा ही नियंत्रण में रहेगी।
Danswrang Boro
😲😲😲👍💪💪🙏🙏
Ajay Meena
Namaste sir, ye woman apne kaam ke sath ek sahi parent hone ka bhi rishta nibha rhe hai.
Ajay Meena
Namaste sir, es ma'am ko meri or se salute. because ese woman maine jindgi me pehli baar dekhi hai. Namaste sir.
KIRAN
आर्थिक रूप से स्वतंत्र महिलाएं भी सामाजिक व पारिवारिक दबाव में रहती हैं उन पर घर और बाहर की दोहरी जिम्मेदारी भी है और सुनने को भी मिलता है कि नौकरी करने का चुनाव तो तुमने ही किया था अपनी चेतना के उपयोग की स्वतंत्रता अभी भी दूर की कौड़ी है
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K
Kamini Pareek
sach h sab apna adhikar samjna maa boleker kabhi bahu . bati
Durga kumawat
⚡समाज में स्त्री का सम्मान वही तक रहता है जहां पर वह समाज द्वारा बनाए गए रीति-रिवाज और मान्यताओं का पालन करती हो। अगर महिला अपने अनुसार काम या जीवन जीते है तो वह समाज के लिए एक कुचलन स्त्री है।
अगर महिला बौद्ध 🪔 जीवन जीती है। और अपनी आवश्यक जरूरतो को पूरा करने के लिए आर्थिक स्वतंत्र है तो हम उस महिला का सम्मान करेंगे।
Durga Rathod
पुरुष महिला को उससे आगे बढ़ते नहीं देखना चाहता, क्योंकि पुरुष को ऐसा लगता है, महिला अगर बाहर काम करने लग गई तो, ओ मेरी बात नहीं मानेगी, अपना दर्जा मुझसे ऊपर बना लेगी।ओ आजाद पंछी होकर उड़ने लगेगी, यही सोच पुरुष की ज्यादातर महिलाओ को घर में चार दीवारी मे ही कैद करके रखती हैं। अब भी भारत में ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं,जो बाहर काम करना चाहती तो है, मगर उनके पति नहीं भेजते, इसी डर के कारण कि स्त्री अगर बाहर जाकर कमाने लगे तो, सशक्त बन जाएगी और पुरुष को कम आंकने लग जाएगी, यही मानसिकता पुरुष की होती हैं।
और दूसरी ओर देखे तो, कुछ महिलाएं ऐसी भी है, जो खुद ही बाहर कमाना नहीं चाहती, क्योंकि उन्हें लगता है, पुरुष कमाकर हमे पालते हैं, सब शौक पूरे करते हैं, सुरक्षा मिल रही है, घर में ही रहना उन्हें ज्यादा उचित लगता है, फिर ओ पुरुष पर निर्भर हो जाती हैं, पुरुष फिर जो चाहे सितम ढाए, सब सह लेती है, क्योंकि ओ महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलना चाहती, उन्हें घर में ही सुरक्षित, ऐशो आराम महसूस होता है। वे संघर्ष करनेसे बचती है, और चार दीवारी में कैद रहना चाहती है। और फिर पुरुष वर्ग उन्हें अपने उपभोग की वस्तु की तरह उपयोग करता है। बस बिस्तर गरम कर और स्वादिष्ट खाना बना,2,4, बच्चे पैदा कर उन्हें भी संभाल, यही औकात है, पुरुष की नजर में स्त्री की। मूढ़ होती है ओ महिलाएं जो यह सब अन्याय सह लेती हैं। और इसे एक पत्नी, एक मा की जिम्मेदारी,और कर्तव्य मान लेती है।😡
हर महिला को आत्मनिर्भर बनना होगा, ताकि कोई उसे गुलाम ना बना सके, चार दीवारी में कैद ना कर सके। उसके लिए आत्मज्ञान की ज्यादा जरूरत है, गीता की सबसे ज्यादा जरूरत है।🙏
Sneha Pawar
Financial independence is indeed more than a salary.
It makes us capable enough to take our decisions, to pursue our interest, to lead a life as per our own understanding, also to help others.
Also when one is financially independent, one is not obligated to agree to others decision.
Especially for women, it is the most important.
Financial dependence makes a person vulnerable.
Bharat kushwaha
mahila ka samman karna mai meri maa se sikha lekin mahila ko apna samman swayam karna hota hai duniya apne aap samman kar legi
Sankalp Trivedi
yaha bhi ladke haar gaye ,प्रकृति से.🙏🙏🙏💙💙🙏🙏
ABHI NAYAK
🙏
ROHIT KUMAR
सारी बाते चुनाव के साथ ईमानदारी और सही नीयत पर निर्भर करता हैं जब "मैं" अनुपस्थित होता है तब चुनाव का जो केंद्र होता है वो सही होता है और ये "मैं" की अनुपस्थिती में ही संभव है।
M
Manisha singh
💪💪💪💪💪
bhagyavati soren
आज भी महिलाओं को वह सम्मान नहीं मिलता, इसके पीछे कारण खुद महिलाएं भी होती हैं। अक्सर इन्हें सेविका के रूप में देखा जाता है। मुख्यत उनका काम, बच्चे संभालना और रसोई देखना होता है।
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Swati
स्वतंत्रता का अर्थ हैं अपनी चेतना का उपयोग कर पाना,तथ्य और शर्तों के आधार पर जीवन जीने का निर्णय ले पाना(शिक्षा), ना कि आर्थिक दृष्टि से सक्षम होना।आंकड़े बताते हैं कि महिला रोजगार बढ़ा हैं,पर नेतृत्व करने में उनकी भागीदारी कम है। क्योंकि समाज ने उन्हें शिक्षा नहीं दी,उनको अपने स्वार्थ में बांधा और उसे प्रेम,सम्मान,त्याग,आदर्श का नाम दिया। विवाह व मातृत्व के बाद उनका नौकरी ना करना दिखाता हैं कि परिवार देखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी,कर्तव्य हैं और उसकी चेतना,जिज्ञासा,भविष्य में और बौद्धिक और शारीरिक रूप से विकसित होने की संभावना को अनदेखा कर जाता हैं और पुरुष को आगे बढ़ा देता,जबकि परिवार बनाने और बढ़ाने में दोनों की भागीदारी होती हैं।इस तरह का वर्गीकरण स्त्री के दायरे को संकीर्ण,पुरुष के दायरे को विस्तृत करता हैं और समाज में एक निर्भर तो दूसरी तरफ निर्णय लेने वाला,आर्थिक सहायता देने वाले वर्ग का निर्माण करता हैं। ये समाज दोनों वर्गों में हीन,निम्न,आधारित रहने वाले अहंकार तो दूसरी तरफ घर चलना, निर्णय लेना ,मुझे देखना है वाला अहंकार जन्म लेता हैं और समाज अज्ञान में जीता हैं। ये व्यवस्था समाज को मजबूत नहीं होने देती, कमजोर, निर्भर, अपंग बनाती हैं। कुपोषण ,गरीबी , गंदगी,जनसंख्या वृद्धि, अंध विश्वास, तनाव अशिक्षा व पर निर्भरता के कारण है।
✍🏻 पोस्ट 11 | 27 जुलाई '26 💭 विषय — अर्थशास्त्र / व्यापार ────────── 🎯 क्या आर्थिक रूप से…