
महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्म निर्भर होना ही उसे सम्मान का पात्र बनाती है, यह कहना भी गलत है कई बार पुरुष तो पुरुष है महिला भी सम्मान नहीं करती हैं l काम कर के भी सुनना पड़ता हैं l
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महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्म निर्भर होना ही उसे सम्मान का पात्र बनाती है, यह कहना भी गलत है कई बार पुरुष तो पुरुष है महिला भी सम्मान नहीं करती हैं l काम कर के भी सुनना पड़ता हैं l

भानमती जी, आपने जो देखा वो सही है, सम्मान न मिलना सिर्फ पुरुष या स्त्री होने से नहीं जुड़ा, ये देखने वाले की चेतना से जुड़ा है। एक कामकाजी स्त्री भी उतनी ही तीखी बात कह सकती है जितना कोई पुरुष, क्योंकि अहंकार का कोई लिंग नहीं होता, वो जिसे भी मिलता है उसी में बैठ जाता है। पर यहाँ एक बात पर ग़ौर करें, आपने कहा काम कर के भी सुनना पड़ता है। ज़रा देखिए, यह सुनना किससे आ रहा है, क्या वो स्वयं आर्थिक रूप से स्वतंत्र है फिर भी नियंत्रण करने की आदत नहीं छूटी, या वो भी उसी निर्भरता में जी रही है और बस अपनी असुरक्षा दूसरी स्त्री पर उतार रही है। यह फ़र्क समझ लेना ज़रूरी है, क्योंकि इससे पता चलता है कि लड़ाई सिर्फ स्त्री बनाम पुरुष की नहीं, बल्कि हर उस मन की है जो नियंत्रण को ही अपनापन समझ बैठा है।