
अपने दम पर कमाए गए बीस हज़ार रुपये भी दूसरे द्वारा मुफ्त में दिए गए एक लाख बीस हज़ार रुपये से ज्यादा दम और गरिमा रखते हैं। आचार्य जी मैंने कभी कल्पना में भी नहीं सोचा था कि अपनी पढ़ाई के साथ-साथ मैं पैसे भी कमा रही होऊंगी, पर आज मैं यह कर रही हूँ। मुझे कभी यह ज़रूरत महसूस नहीं हुई कि मुझे अभी से पैसे कमाने हैं, कम से कम इतने कि खुद का खर्चा निकल जाए। मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा था क्योंकि मैं ज़्यादा अरमान नहीं रखती और मेरे कुछ ख़ास शौक़ भी न…













































