मूल निसंग, मस्तिष्क मात्र अंग || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
आचार्य प्रशांत
अपने करे संसार तो मिला नहीं, परमात्मा क्या मिलेगा || आचार्य प्रशांत (2014)
तोता बोला, “मैंने चुना है पिंजरा” || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
अध्यात्म का मज़ा ये कि बेवकूफ़ी मन में उठती ही नहीं || आचार्य प्रशांत (2017)
अहंकार और रवैया || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
भय और भविष्य || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
असुरक्षा और डर || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
ईमानदारी है होली के बाद का साफ़ चेहरा || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
शास्त्र यदि ज्ञान हैं,तो तुम्हारे काम न आएंगे || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2015)
न मम न त्वम्, प्रेम है सर्वम || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
तुम अपने पर लादा गया अपना एक अंधविश्वास हो || आचार्य प्रशांत (2014)
निजता क्या है ? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
मदद करने में डर क्यों लगता है? || आचार्य प्रशांत (2018)
सवाल नहीं, समझ || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
कौन किसी की सुनता है || आचार्य प्रशांत (2018)
गपशप (गॉसिप) और वार्ता में अंतर || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
बिना उद्देश्य के काम कैसे करें? || आचार्य प्रशांत (2018)
मूल्य से निकटता ही मूल्यहीन का त्याग है || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2014)
अज्ञेय के आगे झुकना सीखिए || आचार्य प्रशान्त (2016)
अभिभावकों का कहना मानें या नहीं? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)
स्वधर्म वही जो स्वभाव की ओर ले जाए || आचार्य प्रशांत (2014)
प्रेरणा-प्रोत्साहन कितने ज़रूरी हैं? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2016)
कैसे जानें कि सत्संग समझ में आया? || आचार्य प्रशांत (2017)
जैसी लौ प्रथमहि लगि || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
बोध साहित्य को धीमी गति से पढ़ने की समस्या || आचार्य प्रशांत (2013)
अँधेरा कितना भी बड़ा हो, नज़र तो रोशनी पर ही टिकेगी || आचार्य प्रशांत (2017)
कहाँ से आता है हमारा व्यवहार? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
इच्छाएँ और तलाश || आचार्य प्रशांत (2016)
गुरु के स्तर का नहीं, अपने स्तर का प्रश्न पूछो || आचार्य प्रशांत (2019)
मन तो उलझा है, दिल फिर भी सुलझा है || आचार्य प्रशांत (2016)