शास्त्र सहारा देते हैं, असली गुरु जीवन है || आचार्य प्रशांत (2014)
आचार्य प्रशांत
आत्म-जिज्ञासा क्या है? || आचार्य प्रशांत (2014)
मन तुम्हारा पूरा भय से युक्त,कभी मत कहना तुम भय से मुक्त || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
अपने अंधकार से दूसरों को कैसे रौशन कर पाओगे || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
पूर्णता मुखर मौन है; तुम्हारी सारी कहानियाँ अपूर्णता की हैं || आचार्य प्रशांत, ज़ेन पर (2014)
सारे सूखेपन को बहा ले जाता है प्रेम || आचार्य प्रशांत, कबीर पर (2014)
उसके बिना तड़पते ही रहोगे || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
उसकी गुलामी ही तुम्हारी आज़ादी है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
सच है, न मौत है, न डर है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
सेक्स और मौत में क्या संबंध है? || आचार्य प्रशांत, खलील जिब्रान पर (2014)
वो तो तुम्हें देख ही रहा है, तुम उसे कब देखोगे? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
देह का रिश्ता नष्ट हो जाएगा, क्या है जिसे काल छू नहीं पाएगा? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
सत्य न पढ़ा जाता है, न सुना जाता है, सत्य मात्र हुआ जाता है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
शास्त्र यदि ज्ञान हैं, तो तुम्हारे काम न आएंगे || आचार्य प्रशांत (2014)
कीचड़ का सानिध्य तुम्हारे रोम-रोम से महकेगा || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
निजता वो अदृश्य रौशनी है जो सब कुछ दिखाती है || आचार्य प्रशांत (2014)
संत वो जो तुम्हें विशुद्ध तुम ही बना दे || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
इच्छा जिसे तलाश रही है वो इच्छा द्वारा मिल ही नहीं सकता || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
निर्मलता की गहरी अभिलाषा ही तुम्हें निर्मल करती है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
गरीब वो है जिसे अभी और चाहिए || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
संसारी सिर्फ़ अपने लिए रोता, संत चिंतित संसार के लिए होता || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
जीते हुए को हारने से क्या डर? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
संसार बीतता देखकर भी संसार समझ नहीं आता? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
गहराई अस्पर्शित रहे || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
प्रेमी मात्र एक है अन्य का क्या विचार || आचार्य प्रशांत (2014)
सीमाओं की बात क्या, हमें असीम से मतलब || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
जिसने असत्ता जानी शरीर और मन की,वही करेगा खोज अब स्वयं की || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
मरोगे अकेले ही || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
अज्ञान - दुःख की खान || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
यदि सहज आनंद को ठुकराया, तो विकल्प बनेंगे मनोरंजन और माया || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)