जो बढ़े-घटे, आकर्षित करे, वो प्रेम नहीं || आचार्य प्रशांत (2016)
आचार्य प्रशांत
यदि उसे नहीं चाहता तुम्हारा प्रेमी, तो तुम्हें कैसे चाहेगा? || आचार्य प्रशांत (2015)
प्रेम और आकर्षण || आचार्य प्रशांत (2014)
न बंधन है,न मुक्ति चाहिए || आचार्य प्रशांत, उपनिषद पर (2014)
प्रेम और होश || आचार्य प्रशांत (2014)
प्रेम और ध्यान में क्या सम्बन्ध है? || आचार्य प्रशांत (2016)
प्रेम में तोहफ़े नहीं दिए जाते, स्वयं को दिया जाता है || आचार्य प्रशांत (2016)
कल्पना है शहद की धार,असली प्रेम खड्ग का वार || आचार्य प्रशांत (2013)
शून्य में नग्न रह जितने लिबास ओढ़ने हों,ओढ़ो || आचार्य प्रशांत (2014)
एक गुरु से पाना चाहे और कुछ नहीं पाता है, दूजा गुरु के प्रेम में पाना भूल जाता है || आचार्य प्रशांत
निकटवर्ती को ही हाथ बढ़ा कर सहारा दिया जा सकता है || आचार्य प्रशांत (2015)
माँ-बाप तुम्हारी ही तरह आम हैं, उनसे विशिष्टता की उम्मीद अन्याय है || आचार्य प्रशांत (2013)