क्या हैं विचार? झूठी रिक्तता का झूठा उपचार || आचार्य प्रशांत (2015)
आचार्य प्रशांत
जो बढ़े-घटे, आकर्षित करे, वो प्रेम नहीं || आचार्य प्रशांत (2016)
दो ध्रुवों के मध्य भटकता रहता है मन || आचार्य प्रशांत (2015)
जो वचन आपसे न आए, वही मीठा है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2016)
सत्य में डूबते हैं, अंजाम का अनुमान नहीं लगाते || आचार्य प्रशांत (2016)
प्रेम और ध्यान में क्या सम्बन्ध है? || आचार्य प्रशांत (2016)
आगे और करने का विचार उन्हीं को आता है जो अभी के काम में पूरे नहीं होते || आचार्य प्रशांत (2015)
मैं दूसरों से इतना प्रभावित क्यों हो जाता हूँ कि उन्हीं की तरह बर्ताव करने लगता हूँ?||आचार्य प्रशांत
तुम्हारी परम मुक्ति में यह भी शामिल है कि तुम अमुक्त रहे आओ || आचार्य प्रशांत (2016)
प्रेम में तोहफ़े नहीं दिए जाते, स्वयं को दिया जाता है || आचार्य प्रशांत (2016)
कल्पना है शहद की धार,असली प्रेम खड्ग का वार || आचार्य प्रशांत (2013)
बाहरी चुनौतियों से लड़ो और आंतरिक चुनौतियों को भूल जाओ || आचार्य प्रशांत (2016)
अपूर्ण पूर्ण के रूप में भी अपनी अपूर्णताओं को ही चाहेगा || आचार्य प्रशांत (2015)
एक गुरु से पाना चाहे और कुछ नहीं पाता है, दूजा गुरु के प्रेम में पाना भूल जाता है || आचार्य प्रशांत
ग्रन्थों के साथ सत्संग हो सकता है, तर्क या बहस नहीं || आचार्य प्रशांत (2015)
आगे की जीत को हार कहते हैं || आचार्य प्रशांत, संत हाफ़िज़ पर (2016)