
I highly recommend Aatmgyaan to anyone who is sincerely looking to understand themselves on a deeper level. This book doesn't just offer theoretical concepts, it acts as a mirror to your own mind. Acharya Prashant has a remarkable way of breaking down profound spiritual truths into language that is incredibly accessible, concise, and crisp. What I loved most is how beautifully each chapter is str...
I listen acharya Prashant few time ago and I fill very connected with each and every word he said ,and I watch lot of his video on different social media platform ang he always shows us the different perspective of our life and always shows us what is the actual reality. Thank you Acharya Prashant.

यह किताब आत्मा और आत्मज्ञान को लेकर फैली हुई धारणाओं और अंधविश्वासों को तोड़ती है। आचार्य प्रशांत जी ने बहुत ही तर्कपूर्ण, साफ़ और प्रामाणिक ढंग से बताया है कि आत्मा कोई रहस्यमयी चीज़ नहीं, बल्कि जीवन को जागरूकता से जीने की कला है। इस किताब ने मुझे अपने भीतर झाँकने, खुद को समझने और जीवन को ज़िम्मेदारी से देखने की प्रेरणा दी। हर अध्याय एक नए दृष्टिकोण को खोलता है। सच में, यह किताब ज्ञान नहीं, आत्म...

इस पुस्तक को पढ़ने के बाद मुझे बहुत स्पष्टता मिली है। मैं पहले बहुत उदास रहता था अपने विचारों को लेकर, कर्मों को लेकर, कि यह मेरे साथ क्या हो रहा है मुझे कुछ समझ में नहीं आता था। बाहर जो कुछ भी होता देखता था तो उसमें ऐसा लगता था कि यह सब मेरे साथ ही क्यों हो रहा है यह जो गलत हो रहा है यह मेरे साथ ही क्यों हो रहा है? इस पुस्तक को पढ़ने के बाद समझ में आया कि आत्मज्ञान का अर्थ किसी बाहरी वस्तु का ज...

पहले मैं खुद की तरफ़ देखे बिना हर वो काम करती जो हम अपने रोज़ के कामों में करते हैं, हर जगह बस दूसरों की कमियां देखना, खुद को छोड़कर हमेशा दूसरों की बातें करना, कुछ मेरे अनुसार नहीं होता तो खुद की तरफ़ देखने की बजाय इसका दोष भगवान और दूसरों को ही देती । जबसे मैंने 'आत्मज्ञान ' किताब पढ़ी है,तबसे आँखें खुद को देखती है और सच में मैं जहाँ भी फंसी हूँ उसमें मेरी ही गलती नज़र आती है क्योंकि उसमें चुनाव...

पहले मैं खुद की तरफ़ देखे बिना हर वो काम करती जो एक आम मनुष्य करता है, हर जगह बस दूसरों की कमियां देखना, खुद को छोड़कर हमेशा दूसरों की बातें करना, कुछ मेरे अनुसार नहीं होता तो खुद की तरफ़ देखने की बजाय इसका दोष भगवान को देती 🤦 जबसे मैंने 'आत्मज्ञान ' किताब पढ़ी है, तबसे आँखें दूसरों में गलती/बुराई देखने से पहले खुद को देखती है और सच में मैं जहाँ भी फंसी हूँ उसमें मेरी ही गलती नज़र आती है क्योंकि ...