
इस पुस्तक को पढ़ने के बाद मुझे बहुत स्पष्टता मिली है। मैं पहले बहुत उदास रहता था अपने विचारों को लेकर, कर्मों को लेकर, कि यह मेरे साथ क्या हो रहा है मुझे कुछ समझ में नहीं आता था। बाहर जो कुछ भी होता देखता था तो उसमें ऐसा लगता था कि यह सब मेरे साथ ही क्यों हो रहा है यह जो गलत हो रहा है यह मेरे साथ ही क्यों हो रहा है? इस पुस्तक को पढ़ने के बाद समझ में आया कि आत्मज्ञान का अर्थ किसी बाहरी वस्तु का ज...