इस किताब की audiobook पर काम कर रही हु |इस किताब ने मुझे अपने आप को देखने को मजबूर किया |मुझे लगा था की मै खुदकों जानती हु पर हर पंक्ति ने मेरे भ्रम तोड़े |ये किताब एक दर्पण है |इसमे झाकने वाला या तो टूटता है या जागता है |