मिशन के सामान्य खर्चों और विस्तार के लिए
सितंबर'26 माह के लिए संसाधनों की आवश्यकता
प्राप्त: ₹ 1,97,94,875
ज़रूरत: ₹ 5,00,00,000
40%
दुनिया अज्ञान के अंधकार में डूबी हुई है, और जिनका कर्तव्य था आपको मार्ग दिखाना—सरकारें, मीडिया, धार्मिक नेता—वे सब असफल हो चुके हैं।
आचार्य प्रशांत ने उस युद्ध को अपनाया है जिसे बाकी सभी ने त्याग दिया था — अंधविश्वास और छल के खिलाफ़ संघर्ष। लेकिन यह युद्ध अकेले नहीं लड़ा जा सकता। यह आंदोलन अब गाँव-गाँव में है, करोड़ों लोगों तक पहुँच चुका है, फिर भी ईमानदारी से और संस्थागत रूप से काम इसी क्षण से शुरू करना है।
आवश्यकता
- सुरक्षित कार्यालय
- शिक्षाओं के बड़े पैमाने पर अनुवाद
- डिजिटल विस्तार
- आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर
- अनुभवशील सहायता
- उच्च-गुणवत्ता वाली वीडियो निर्माण टीम
आपका आज का सहयोग सुनिश्चित करेगा कि सत्य हर घर, हर हृदय, और हर मार्ग तक पहुँचे। यह आपका अपने भाग्य निर्माण का निमंत्रण है। निर्मित होकर आइए! स्वधर्म निभाइए!
पुस्तक प्रकाशन विभाग हेतु
सितंबर'26 माह के लिए संसाधनों की आवश्यकता
प्राप्त: ₹ 1,50,343
हर दिन, दुनिया भर में अरबों लोग बेचैनी और उलझन के साथ जागते हैं — ऐसी चीज़ों के पीछे भागते हुए जो उन्हें कभी संतुष्ट नहीं करतीं, ऐसे रिश्तों और आदतों में फँसे हुए जिन्हें वे समझ भी नहीं पाते।
दशकों से, यह मिशन इस अंधकार से सीधे टकराता रहा है। आचार्य प्रशांत की पुस्तकें एक ही उद्देश्य से हैं: हर उस इंसान का दुख कम करने के लिए, जो इन्हें पढ़े।
लेकिन अब यह लड़ाई संसाधनों की कमी से जूझ रही है। कागज़ महंगा हो रहा है। शिपिंग की लागत बढ़ रही है। और जो संसाधन हम नहीं जुटा पाते, उसका सीधा अर्थ है—किसी ऐसे व्यक्ति तक पुस्तक नहीं पहुँच पाएगी, जिसे उसकी सबसे अधिक ज़रूरत थी।
यह सिर्फ़ सहयोग माँगना नहीं है। यह आपको हमारे साथ खड़ा होने का आमंत्रण है। हमने अपनी तरफ़ से जो संकल्प लिया है, हम वह निभाते रहेंगे — बस चाहते हैं कि आप भी इस मिशन में हमारे साथ जुड़ें। अपना योगदान दें।
आपका सहयोग कहाँ लगता है:
- अनुवाद — इन पुस्तकों को गुजराती, तमिल, तेलुगु, मराठी, बंगाली और अन्य भाषाओं तक पहुँचाना
- पुस्तकों की कम कीमत — ज्ञान को हर इंसान की पहुँच में लाना
- बुक स्कॉलरशिप — जो आर्थिक तंगी में हैं, उन तक मुफ्त पेपरबैक पहुँचाना
- आईटी डेवलपमेंट — हमारी वेबसाइट और ऐप को बनाना और चलाना
- डिजिटल मार्केटिंग — महंगा ज़रूर है, पर नए पाठकों तक पहुँचने का सबसे बड़ा ज़रिया
- विशेषज्ञ टीम — प्रूफरीडर, अनुवादक, टाइपसेटर, डिज़ाइनर और मार्केटर, जो इन पुस्तकों को जीवंत बनाते हैं
कहीं कोई ऐसा इंसान है, जो कभी पुस्तकें खरीद ही नहीं पाया — और अब उसे पुस्तक मिलने वाली है, सिर्फ आपकी वजह से।