
Goa में 8 दिन कैसे बिता पता ही नहीं चला । समुद्र किनारे घंटों बैठे रहना, HIDP, भजन, भजन के साथ मस्त होके नाचना, फिर सत्र के गहराई में डूब जाना ,सत्र की रोशनी से खुद के अन्धकार (अज्ञान) को देखना और समझना, अनजान लोगों से मिलना और उनसे बात करके ऐसे अनुभव होना जैसे उन्हें बहुत पहले से ही पहचानती हूँ। आचार्य जी आप से हमें जो परिवार मिला है वह बहुत ही अनूठा है, क्युकी हमारी जो तथाकथित परिवार है उसमें स्वार्थ के ही संबंध होते हैं, लेकिन इस परिवार में…































