
WWM के 3 दिन कब बीत गए पता ही नहीं चला। यह 3 दिन सच कहूं तो मेरे लिए अलग ही दिन थे। कुछ सवाल भीतर लेकर गयी थी। सोचा था मौका मिला तो आचार्य जी से पूछ लूँगी। पर पूछने कि ज़रूरत नहीं पडी। पहले ही दिन HIDP एक्टिविटी में जवाब मिल गया। दूसरे दिन की HIDP एक्टिविटी और बात चित ने दिखा दिया कि मैं जो भी निर्णय ले रही हूँ वो कहाँ से आ रहा था। मैं क्यों अपनी बेटी को लेकर इतनी protective होती हूँ, life में सब sorted रखना चाहती हूँ वो सब बातों बातों में बाहर…
















