
मेरे पास कुछ नहीं है कहने को आचार्य जी, मैं बस कृतज्ञ हूँ कि आपने मुझे अपने इतने पास आने का मौका दिया, आपने मुझे किसी लायक समझा । आपने ही समझाया कि कमज़ोर नहीं हूँ , एक आप ही हो केवल मेरी ज़िंदगी में जिसने वास्तव में प्रेम किया है मुझसे । वो प्रेम जो और कुछ नहीं चाहता मुझसे बस यही चाहता है कि मैं बेहतर जिंदगी जीकर जाऊं , जितना ऊँचा उठ सकता हूँ उतना ऊँचा उठ जाऊं इससे पहले कि काल अपनी गोद में बिठा ले । और बाकी सब जो प्रेम का दावा करते हैं उनके पास…












































