✍🏻 पोस्ट 15 | 8 अगस्त '26
💭 विषय — मनोविज्ञान──────────
📚 किताब खोलते ही अचानक फोन याद आ जाता है
❓क्या आपने कभी गौर किया है? कई बार हम पढ़ाई से नहीं बच रहे होते... हम उस बेचैनी, डर या असुविधा से बच रहे होते हैं जो पढ़ाई शुरू करते ही भीतर उठती है।
📖 पाँच मिनट पढ़ने बैठते हैं...
📱 "पहले ज़रा फोन चेक कर लूँ।"
📺 फिर एक वीडियो...
🎮 फिर थोड़ा मनोरंजन...
⏰ और देखते-देखते एक घंटा बीत जाता है...
लेकिन क्या यह सिर्फ़ आलस है? मनोविज्ञान इसे क…
yes this happen with me also jab mein pdhne bethti hu ..books kholti hu but ussi time dimagg mein alg alg trah ke thoughts chlne lgte ha phir phone uttha leti hu phir time ka pta nhi chlta aur raat ko guilt hota aur subah phir bahi loop repeat
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Vivek
क्या काम सच में कठिन है, या वह मेरे उस रूप को चुनौती दे रहा है जिसे मैं हर हाल में सही साबित करना चाहता हूँ?
नहीं, काम उतना कठिन नहीं है, वह मेरे उस रूप को चुनौती दे रहा है जिसे मैं ( अहंकार ) हर हालत में सही साबित करना चाहता हूँ। मैं अपने बारें में बनाई हुई अपनी छवि को बचाने के लिए ही अपने वर्ग की पढ़ाई, गीता सत्र, गीता परीक्षा और बोधकार्य से भागता रहता हूँ, क्योंकि ये सभी मेरी छवि और वास्तविकता के बीच के अंतर को सामने ला देते हैं।
❓आप कौन सा काम बार-बार टाल रहे हैं? क्या आप उस काम से बच रहे हैं, या उस सच्चाई से जो उसे करने पर आपके सामने आ सकती है?
मैं पढ़ाई, गीता सत्र, गीता परीक्षा और बोधकार्य को बार-बार टाल रहा हूँ। मैं इन्हें इसलिए टाल रहा हूँ ताकि उस सच्चाई से ( कि मैं एक पुस्तकों से प्यार करने वाला छात्र नहीं, बल्कि सम्मान और अपनी छवि के पीछे भागने वाला छात्र हूँ; मैं मुक्ति चाहने वाला छात्र नहीं, बल्कि क्षुद्र स्वार्थों के लिए मुक्ति तक को ठुकरा देने वाला छात्र हूँ, मैं गीता का भी अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए उपयोग करने वाला छात्र हूँ ) बच सकूँ जो ये काम करते वक्त मेरे सामने आ जाता है।
कल कृष्ण जन्माष्टमी है। जैसा कि आचार्य जी कहते हैं कि जन्माष्टमी को कृष्ण का जन्म दिवस नहीं, अपना जन्म दिवस मनाओ। अर्थात अगर अभी तक गलत राहों पर चल रहे हो तो अब सही राह को चुनकर अपने आप को नया जन्म दो।
लेकिन मैं हूँ कि अपने आप को नया जन्म देने के बजाय फिल्मों में डूबा रह रहा हूँ और अपना समय बर्बाद कर रहा हूँ। मैं यह जानते हुए भी कि फिल्मों में जैसा सम्बन्ध hero और heroine का होता है वैसा व्यवहारिक जीवन में संभव नहीं है, अगर आत्मज्ञान नहीं होगा तो पारिवारिक क्लेश और कलह के अलावा और कुछ नहीं मिलेगा।
मैं हर बार खोखला आह्वान करता हूँ कि इस बार मैं सुधरूँगा, लेकिन हर बार उन्हीं दलदलों को चुनता हूँ।
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Sadhana Gupta
ha mene bhi kam karke thoda rest karle fir thoda mobile chala le time bhit jata hai
Anupam DN
main ghar ke kam Karti hun FIR sochati hun thoda aaram kar lun aalash aata Hai FIR bacche ki coaching ka kam karvate Hain to Aacharya Ji ko jyada sunane ka time nahin milta Hai
Madhu
(1) आप कौन सा काम बार-बार डाल रहे हैं ? क्या आप उसे कम से बच रहे हैं ,या उसे सच्चाई से जो उसे करने पर आपके सामने आ सकती है?
⭐ विद्या विद्या मुझे समझ नहीं आ रहा है इस पर जो बोध कार्य आ रहे हैं मैं उसे कर नहीं पा रही हूं मेरे लिए कठिन है तो उसको पढ़ कर डाल दे रही हूं
Vaishnavi dange
ha mere anmndar bhi ye aadat he me jab machine chalati hu tab blouse pura nahi kar pati kabhi bahar dekhati hu kabhi aayne me hi dekhati hu aur kam bhi me puri active nahi rahti
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Bhanmati sahu
मैं अपने अहम से बच रही हूं,और कई कामों को टाल देती हूं, जो मुझे वास्तविकता से अवगत करवाएं
Sonam Bharti
पढ़ाई से ओर कोई भी नया काम शुरू करने से
Piyush
पढ़ाई, उस सच्चाई से जो मेरी छवि तोड़ सकती है।
Who am I ?
one who starts watching shorts, lost in imagination, keep thinking of doing but never start or complete.
Vivek
मैं पढ़ाई को बार-बार टाल रहा हूँ। मैं पढ़ाई से नहीं बच रहा हूँ , बल्कि उस सच्चाई से बच रहा हूँ जो उसे करने पर मेरे सामने आ सकती है।
मैं अभी तक अपने आप को पढ़ाकू, ईमानदार और बुद्धिमान बच्चा समझता था, लेकिन अब जब मैं पढ़ने बैठता हूँ तो यह तथ्य मेरे सामने आ जाता है कि मैं कामचोर, किताबों से दूर-दूर तक कोई नाता न रखने वाला और डरपोक छात्र हूँ। इसलिए अपने उस झूठे छवि को बचाने के लिए बार - बार पढ़ाई को टालता रहता हूँ ।
लेकिन मैं वादा कर रहा हूँ कि मैं आज से जरूर पढ़ाई करूंगा।
Jyoti sharma
jb kai sare kaam ikththe ho jate h tb unme se kisi ek kam ko krne lgti hu tb baki k bache sabhi kaamo ki trf hi dhyan chala jata h or jis samay hm jo kaam kr rahe hote h ...fir us kaam me bhi puri tarah se mn ni lgta yah mera aàls h ya kúchh or ..,.pta ni .,..,...
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A
Aditi
kuch acha Krna chahti hu but kr nhi pati
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Khushboo kumari
मेरे झारखंड में exam time से नहीं होने के कारण मैं भी पढाई से मन हटाती हूं।
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Ananta Kumar DHAN ACTO
This too heppns with me, I am preparing for Civil service mains, delaying Answer writing
Shalini Kushwaha
अहंकार अपनी पहचान को बचाए रखना चाहता है जहाँ उसकी कल्पना टूट सकती है
Priya
ham bhi jab PAdai Karne baithte hai to or Kam Yaad aane lagte hai ki ye Karna hai vo Karna hai Sare Kam Kar Lete hai bas PAdai Nahi Kar pate MN ikk jagah baith hi Nahi pata pta Nahi kyun Baar Baar bhagta rahta hai PAdai SE jabki pta hai ki PAdai Karna bahut jaruri hai hamare liye fhir bhi shayad ham bhi sachchai Ka samna Karne se dar rahe hai,hamne hajaro bar time table Bana liya lakin use follow hi Nahi Kar pate ye bhi Nahi pta kyun?.....🤔
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V
Vidusha Jaiswal
mujhe padhae krni hai pr aalas or mn dono krne nhi dete roj mai talti hu jbki mujhe pta hai padhae mere liye kitna zaruri hai
fuleshwari Sahu
us kam se jo hamre ander jhavi bni huvi usase bchne ki kosis krte hai
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fruti kumari
Haa mere sath bhi kaisa hi hota hai jab mein padhne bhaithti hu to bahar ki bate yad aane lagta hai kuchh se kuchh sochne me hi mera time nikal jata hai or mei padh bhi nahi Pati hun
Arti kumari
मेरी भी स्थिति ऐसी ही है ।मै बुक को खोलने से पहले ज्यादातर समय जब मुझको नोट्स बनाने होते है तब मैं काम को टालती हु रील , वीडियो, यूट्यूब और सो जाना या फिर खाना खानें का बहाना या तो प्यास ये सारी ऐसी चीजें है जो रोज मेरे सामने होता चला जाता है और मैं खुद को रोकने में बहुत देर कर देती हु ।।😵💫😵💫
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Prachi patel
Mai medical field mein Jane ke liye entrance exam ki taiyari kar rahi hu aur online batch bhi li hun padhai puri imandari ke saath karti hun lekin jab har Sunday ko test ka din aata hai to talti abhi nahi kahke kyonki mau us kam se nahi Bach rahi hun balki us sachhai se ho mere samne aa jayega fail hone ka ye mere andar ka ahankar hai
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Saloni
ह मै भी कभी कभी ऐसा ही करती हूं जब फिजिक्स पढ़ना होता है तो कोई ओर सब्जेक्ट पढ़ने लग जाती हूं।
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Ankit Singh
आज के बोध कार्य करने के दौरान जो कि बीसाय मनोविज्ञान पर आधारित था, जो कि यह था कि किताब खोलते ही मोबाइल याद आ जाता है, इस बोध का कार्य को करते वक्त मुझे अपना, अपनी पुरानी स्थिति याद आ गई, कि जब मैं नया-नया अवलोकन करना सीख रहा था, तो अपना अवलोकन जब मैंने शुरुआत शुरुआत में करना स्टार्ट करा था, तो जब मैं अपने आप को देखना शुरू किया था, अपनी सच्चाई को, तो मैं बहुत ज़्यादा ही फ्रस्टेट हो गया था, बहुत ज़्यादा ही. मैं इस घटना के बारे में विवरण में बताना चाहूँगा कि जब मैंने शुरुआत में, जब मैं आत्मावलोकन नहीं करता था, तो मैं यह सोचता था, मेरी यह धारणा बन गई थी कि मैं तो पूरी पढ़ाई कर ही लूँगा, मैं तो सब कुछ पढ़ ही लूँगा समय पे, समय आने पे सब कुछ कंप्लीट कर ही लूँगा, इतना- इतना सब कुछ कर ही लूँगा. समय आने पे जॉब भी ले ही लूँगा, प्लेसमेंट भी ले ही लूँगा जब कॉलेज में कंपनी आएगी तो. लेकिन वह सब छलावा था, झूठ था. वह सब मेरे मन की बस कल्पना थी, वह सब मेरे मन में बस कहानी मात्र गढ़ा गया था कि ऐसे-ऐसे मैं मेहनत कर लूँगा और चौड़ ले लूँगा. तो जब मैंने नया-नया अवलोकन करना जब मैंने चालू ही करा था, तो मैं इसी बात का अवलोकन कर रहा था और लगातार मुझे यह महसूस होते जा रहा था कि जो यह मैंने कहानी गढ़ रखी है, जो यह धारणा बना रखी है, वह झूठ है. तो जब यह मुझे दिखना चालू हुआ था, तो मैं बहुत ज़्यादा ही फ्रस्टेट रहने लग गया था. और इसके कारण मैं बहुत ज़्यादा मास्टरबेट भी करने लग गया था उस समय पे बहुत ज़्यादा ही. तब मुझे पता भी नहीं चलता था कि मैं ऐसा क्यों कर रहा हूँ, मुझे बस गुस्सा आता था हर बात पे क्योंकि मैं देख पा रहा था कि मैं ऐसी धारणा पकड़कर के, ऐसी कामना करके बैठा हुआ हूँ, जो कभी पूरी होने वाली नहीं है. मैं सिलेबस को इतनी जल्दी कंप्लीट नहीं कर पाऊँगा, किसी भी रफ्तार से पढ़ूं तो या होता बिल्कुल भी वास्तुविक रूप से नहीं दिखाई पड़ रहा था. जब मैंने अवलोकन करना चालू किया तो जिसके कारण फिर मुझे बहुत ज़्यादा फ्रस्टेशन उठ रहा था और फिर मैं मास्टरबेट कर रहा था और फिर अपने आप को और भी ज़्यादा निराश करके रख रहा था. तो यह साइकल चल ही रहा था लगातार. अब धीरे-धीरे-धीरे-धीरे जैसे आचार्य जी की शिक्षाओं का गहरे से लाभ होता जा रहा है वैसे-वैसे ही मैं यह समझता जा रहा हूँ कि कल्पना करने से मात्र नहीं होगा. और मैं अब उस राह में आगे बढ़ चुका हूँ थोड़ा. अब मैंने, मैं इस स्थिति में आ गया हूँ कि अब मैं सिर्फ और सिर्फ मेहनत पे ही भरोसा कर रहा हूँ. अब मैं समझ गया हूँ कि सारा खेल मेहनत का है, अब मुझे लगातार मेहनत ही करनी है. अब मैं इससे पीठ नहीं दिखा सकता, पीछे नहीं हट सकता, इससे भाग नहीं सकता. मुझे लगातार मेहनत करनी है, और मेहनत का परिणाम जो भी हो, देखा जाएगा. मेरे पास जिस समय बचा है, उसमें मैं मेहनत करूँ. और लगातार जितना हो सके उतना मैं मेहनत करूँ, बिना अंधी कामना किए हुए कि इसका फल क्या होगा, और मुझे प्लेसमेंट लगेगी कि नहीं. जब मैंने चुनौती चुन ही लिया है, युद्ध चुन ही लिया है कि मुझे इसमें लड़ना है, मुझे पढ़ाई करनी है, कठिन परिश्रम करना है, तो मैं अभी से पीठ नहीं दिखा सकता. मैं अब जूझूँगा पूरी मेहनत के साथ, अपने बूते के साथ, अपनी ताकत के साथ. और मैं जितना परिश्रम कर सकता हूँ, करूँगा. अब मेरी मानसिक स्थिति इस स्तर पे आ चुकी है, और मैं लगातार पढ़ाई करना शुरू कर चुका हूँ. पहले जैसा नहीं कि मेरी बनाई धारणा पूरी न हो रही हो, तो मैं फ्रस्टेट हो जाऊँ और मास्टरबेट करूँ. अब मेरा ध्यान सिर्फ मेहनत पे है. और लगातार, और मुझे अब फ्रस्टेशन भी नहीं होता है. क्योंकि अब मैं सही-सही हर काम को नाप पा रहा हूँ, अपने सीखने के स्तर को भी कि मैं कितना हर दिन में सीख पाऊँगा, और कितना सीख सकता हूँ. और उसी हिसाब से मैं काम भी आगे बढ़ाता हूँ, ना कि अंधी कामनाएं करता हूँ. धन्यवाद आचार्य जी, आपने हमें यह दृष्टि प्रदान की, आपका बहुत-बहुत आभार. आपको सत-सत नमन, प्रणाम.
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K
Krishna Kant
Yes task I am post ponding because I don't have proper knowledge as well for the completion of the task. And task seems heavy coz I am imagining it is!!! acquiring new skill, finding client, working endlessly with no income till any hopefully results!!
Santosh
caught myself red-handed here🙏
Varsha Pandya
बहुत मुश्किल लगता हैं मन लगा कर पढ़ाई करना मुझे तो कोई और चीज disturb नहीं करती बस भूख लगती रहती हैं 😊
लगता हैं पढ़ाई में बहुत energy की जरूरत होती हैं
क्या आपके साथ भी यही होता हैं ?
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A
Anjali Bharti
Mene 2024 mein hi 12th boards diye the lekin usse phle hi y Tay kar Liya tha k mujhe neet Dena h kyunki Doctor banna mera sapna tha yh kisi ne mujhe nhi bola balki papa ne engineering k liye bola tha phir bhi mene medical line choose ki kyonki mein karna chahti thi .par 12mene dhang se tayyari na hone ki vajah se first attempt just check tha and I took drop mujhe ek personal room bhi mil gya and then I started to betray my parents every morning I used to go up and my parents thought I am studying there par mein roz sochti thi shaam se kal se pakka par nhi Hua aur 2nd attempt bhi waste then Mene 2nd drop Liya and decude kiya k now I'll do my best for my dream my goal and now I have one addition in it afmc but again kal se wala loop this year again wasted and right now I am a failed human. Mujhe smjh nhi aa rha tha jab yh mera sapna h toh mein kyon iske liye kuch nhi kar pa rhi hun. Isliye ab mein phle apne aap ko janna chahti hun. I know aaj ke avlokan se mein smjh gyi hun mein ek beimaan insaan hun.
Par mein isss beimaani se Bahar nikalna chahti hun apne aap ko Janna chahti hun aur dekh k liye Hamare rashtra k liye kuch karna chahti hun.
Aaj ka sath mera phla satr tha Pura nhi le payi par jitna Liya Uske Anusara apna avlokan kiya h Mene Acharya ji karte h sirf sunny matr se nhi padha bhi tumhe h is liye Mene 1mahine se Ramcharitmanas padha prarambh kiya h abhi kuch yard nhi rhta par mein puri koshis kar rhi hun ki consistency k saath is padhun
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K
Kalpana
Mai v ek student hu jab v padhne baithi hu to thori der baad man hi nahi karta padhne ka man karta hai ki thora mobile use kar le ya kuch aur kar le mera exam September me hone wala hai mai abhi tak kuch v padh nhi pa Rahi hu aur na hi yaad kar pa Rahi hu
VIJAY LAXMI MEENA
sab logo ke jese me b study se bach rhi hu hal me mera fourth grade me selection huaa h to uske liy बच्चों ने टेलीग्राम पर चैनल बना रखे है उसमें comment पढ़ती रहती हु टाइमपास करती रहती हु जबकि मुझे पता है मेरा 6 दिसम्बर को ras प्री ki exam h uske लिए पढ़ना है मैने ये भ बनाया कि बुक नहीं है अब मेरे पास इको सर्वे की बुक b but me नहीं padh rhi सोच रही हु ज्वाइनिंग के बाद ही पढूंगी
Gajendra Singh
मैं भी सत्र सुनते वक्त ऐसे ही सो जाता हूं
✍🏻 पोस्ट 15 | 8 अगस्त '26 💭 विषय — मनोविज्ञान ────────── 📚 किताब खोलते ही अचानक फोन याद आ…