✍🏻 पोस्ट 8 | 1 अक्टूबर '26
💭 विषय — पर्यावरण और जलवायु────────────
🧊 स्विट्ज़रलैंड के ग्लेशियरों ने एक साल में 5.5% बर्फ खो दी!
स्विट्ज़रलैंड के ग्लेशियरों के लिए 2026 बेहद खराब रहा।
पिछले 12 महीनों में देश की बची हुई ग्लेशियर-बर्फ का लगभग 5.5% पिघल गया। वैज्ञानिकों के अनुसार, एक साल में 2% बर्फ का नुकसान भी कभी अत्यधिक माना जाता था।
इस साल नुकसान उससे लगभग तीन गुना रहा।
☀️ *सर्दियों में बर्फ सामान्य से कम गिरी। मई और जून की गर्मी म…
Cases of climate crisis around the world:
1. Rapid glacier loss in Switzerland.
2. Himalayan glacier-related hazards in Nepal.
3. Severe wildfires in Indonesia.
4. Record-low water levels at Lake Powell, USA.
5. Drought and water shortages in Puerto Rico.
6. Record September warmth across the contiguous United States.
These events made me realise that climate change is not an isolated problem occurring somewhere outside my life. My lifestyle is connected to a larger system of production, energy use and consumption.
Although I cannot directly control every climate event, but I can start with examining my own patterns of consumption, avoid unnecessary waste and make more responsible choices.
The deeper inquiry is into the desire for endless comfort, convenience and accumulation. However, personal restraint alone is not enough; industries, governments and public institutions must also change how resources are produced, distributed and used.
The real challenge is to bring individual responsibility and collective action together before the consequences become even more difficult to reverse.
The Chapter 3 verse 24 of Bhagavad Gita clearly states that,
"One’s actions affect others; therefore, responsibility extends beyond personal interests."
Runjhun
Major Global Extreme Weather Events (September 2026)
• Record-Breaking El Niño Temperatures: Daily sea surface temperatures in the central and eastern equatorial Pacific spiked to 3.08°C above average on September 21, breaking previous historical records. This supercharged global heating and altered weather patterns worldwide.
• Himalayan Rock-Ice Avalanche & Debris Flood: On August 26 extending into early September impacts, a massive disaster triggered by a rock wall collapse on Langtang Lirung shook the Nepal-China border region, causing over 1,300 deaths and severe regional sediment flooding.
• Severe Droughts and Low River Flows: Intense dry conditions plagued parts of South America (Amazon and Central America basins linked to the El Niño spike), alongside lingering European dry spells affecting waterways like the Rhine, Seine, and Danube.
• Tropical Storms and Flooding: The Pacific and parts of Asia faced persistent heavy precipitation and tropical cyclone threats, while transition zones experienced erratic flash floods.
• Extreme Heat Mortalities Warning: Climate scientists and health labs issued warnings tied to the September El Niño spike, projecting hundreds of thousands of vulnerable global heat-related casualties extending into early 2027
Payal Soni
सितंबर 2026 के प्रमुख Climate Events
🌧️ भारत में कमजोर मानसून — पानी और खेती पर असर।
🌊 दक्षिण एशिया में बाढ़ — जनजीवन और यात्रा प्रभावित।
🔥 यूरोप में heatwaves और wildfires — तापमान और air quality पर असर। outdoor activities को प्रभावित करती है।
🌡️ महासागरों का बढ़ता तापमान — मौसम और समुद्री जीवन पर असर।
🌀 El Niño का मजबूत होना — भारत के मानसून और तापमान को प्रभावित कर सकता है।
हमसे संबंध : ये बदलाव पानी, मौसम, स्वास्थ्य, खेती, खाद्य कीमतों और रोज़मर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकते हैं।
climate change को केवल “दुनिया में कहीं बाढ़ या hurricane आया” के रूप में देखने की जरूरत नहीं है। इसका संबंध हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी से है:
Climate → Monsoon → Water → Agriculture → Food prices → Health → हमारी daily life
⭐️ जो प्रकृति को नहीं समझेगा वो प्रकृति को खा जाएगा |
⭐️ जो प्रकृति को पराया जान लेता है वह प्रकृति का परम मित्र हो जाता है क्योंकि वो प्रकृति में हस्तक्षेप नहीं करता |
Ishika sharma
पिछले महीने के प्रमुख क्लाइमेट इवेंट्स
• दक्षिण एशिया और असम में भारी बाढ़: मानसूनी बारिश और हिमनदों के पिघलने के कारण दक्षिण एशिया के कई हिस्सों और पूर्वोत्तर भारत (असम) में भयंकर बाढ़ आई।
• यूरोप और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में हीटवेव और जंगल की आग: - स्पेन, ग्रीस, तुर्की और फ्रांस जैसे देशों में तीव्र गर्मी (हीटवेव) और जंगलों में भीषण आग की घटनाएं हुईं।
• उत्तरी अमेरिका और यूरोप में सूखा व उच्च तापमान: अत्यधिक तापमान और सूखे की स्थिति ने कृषि और जल संसाधनों को प्रभावित किया।
हमसे यही संबंध है कि हमें अत्यधिक गर्मी और प्रदूषणयुक्त हवा से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। जिससे थकान, डिहाइड्रेशन और श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ेगी।
मानसून का अनियमित होना और बाढ़-सूखे की स्थिति हमारे देश की कृषि को सीधे प्रभावित करेगी, जिससे खाद्य सुरक्षा और महंगाई पर असर पड़ेगा।
• पर्यावरणीय जागरूकता: ये घटनाएं हमें यह याद दिलाती हैं कि ग्लोबल वार्मिंग अब दूर की नहीं बल्कि हमारे सामने मौजूद एक वास्तविक चुनौती है, जिससे निपटने के लिए सही ज्ञान और सच्चाई को अपनाना जरूरी है।
Ladli Kumari
नेपाल में हिम पिघलना और पहाड़ों पर भूस्खलन
Braj mohan
दुनिया में जो भी आज इवेंट हो रहे हैं उन सबका सम्बन्ध क्लाइमेट चेंज से है l
Sangita mote
पिछले महीने (सितंबर 2026) की प्रमुख जलवायु घटनाएं:
• ऐतिहासिक 'सुपर एल नीनो': प्रशांत महासागर में रिकॉर्ड तापमान वृद्धि के साथ एक बेहद शक्तिशाली एल नीनो पूरी तरह सक्रिय हुआ, जिसने वैश्विक मौसम का संतुलन बिगाड़ दिया।
• रिकॉर्ड तोड़ गर्मी: पश्चिमी यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका (US) ने अपने इतिहास के सबसे गर्म और सबसे उमस भरे सितंबर महीने का सामना किया।
• विनाशकारी बाढ़: लगातार भारी बारिश के कारण थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक जलमग्न हो गई, जिसे आपदा क्षेत्र घोषित करना पड़ा।
हिमालयी क्षेत्र: नेपाल-चीन सीमा पर तेजी से पिघलती बर्फ और मूसलाधार बारिश के चलते बड़े पैमाने पर हिमस्खलन और विनाशकारी बाढ़ आई, जिससे भारी तबाही हुई।
• भारत में मॉनसून की भारी कमी: एल नीनो के असर से भारत में इस साल सामान्य से करीब 12.6% कम बारिश दर्ज की गई, जिससे सूखा जैसी स्थिति बनी।
जलवायु परिवर्तन कोई बाहरी पर्यावरणीय समस्या नहीं है, यह मनुष्य के भीतर की बीमारी का बाहरी प्रकटीकरण है।
Manoj Kumar
इन ग्लेशियर का पिघलना पूरी प्रकृति के लिए नुकसानदेह है अगर इसे बचाया नही गया तो प्रकृति सुरक्षित नहीं है
Anuradha Walia
✨पिछले महीनों में दुनिया भर में और भारत में कई बड़ी और विनाशकारी क्लाइमेट घटनाएं हुई है।
✨उत्तर प्रदेश और बिहार में बाढ़ के कारण कई लोगों की मौत हुई, और कई जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए।
✨सितंबर के आखिरी हफ्ते में सिक्किम के रंबी गांव में 'भीषण भूस्खलन' से कई घरों को नुक्सान पहुंचा।
✨नेपाल और थाईलैंड में 🌨️भारी बारिश, बाढ़ और 🏔️हिमस्खलन के कारण लोगों की मौत हुई, और लाखों लोग प्रभावित हुए।
✨समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी से कैलिफोर्निया के तटों की तरफ विशाल 🌊'केलिवन वेव' की चेतावनी जारी की गई।
आज हम यह सब समाचार दूसरी जगह के सुनते हैं। वह दिन दूर नहीं जब हम भी अपनी 'बुलाई गई आपदाओं' की चपेट में होंगे।
Rohit kumar kushwaha
Major Climate Events
• COP31 Climate Change Conference: Scheduled for November 9 to 20, 2026, in Antalya, Türkiye.
• UN Climate Summit: Convened in New York on September 23, 2026, focusing on clean energy transitions, climate finance, and action acceleration.
• El Niño Forecast: Scientists note a potentially historic El Niño building in the Pacific, peaking between October and December 2026 and intensified by global climate change.
Arti Gupta
❓ ऐसे क्लाइमेट इवेंट्स की सूची बनाइए, जो पिछले महीने दुनिया भर में हुए हैं और बताइए कि उनका आपसे क्या संबंध है?
..स्विट्ज़रलैंड के ग्लेशियरों का तेज़ी से पिघलना — हमारी ऊर्जा-खपत और उससे होने वाले उत्सर्जन से जुड़ा है।
अत्यधिक गर्मी की घटनाएँ — AC, बिजली, परिवहन और अत्यधिक ऊर्जा-उपभोग जैसी मानवीय गतिविधियों से जलवायु पर दबाव बढ़ता है।
भारी बारिश और बाढ़ — बदलते तापमान और जलचक्र में बदलाव से जुड़ी चरम मौसम घटनाएँ हमारे शहरों, खेती और जल-व्यवस्था को प्रभावित करती हैं।
सूखा और जल-संकट — पानी का अत्यधिक दोहन और बदलता वर्षा-चक्र सीधे हमारे भोजन और दैनिक जीवन को प्रभावित करता है।
जंगलों में आग — गर्म और शुष्क परिस्थितियाँ आग के जोखिम को बढ़ाती हैं; इसका असर हवा, जैव-विविधता और मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है।
... मुझे लगता है मै जिस सुविधा को सामान्य मानकर इस्तेमाल करती हूं —बिजली, वाहन, पानी, कपड़े, या दूसरी वस्तुएँ—उनके उत्पादन और उपभोग का पर्यावरण पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है ।
Chumeshvar
कुछ बड़े क्लाइमेट इवेंट्स की सूची:
1. 2021: यूरोप में बाढ़ और उत्तर अमेरिका में हीटवेव
2. 2022: पाकिस्तान में विनाशकारी बाढ़
3. 2022: यूरोप में भीषण गर्मी और सूखा
4. 2023: अमेज़न में ऐतिहासिक सूखा
5. 2023: कनाडा में रिकॉर्ड जंगल की आग
6. 2023: लीबिया में बांध टूटना
7. 2024: ब्राजील में रिकॉर्ड सूखा
8. 2024: दक्षिणी अफ्रीका में सूखा
9. 2024: फिलीपींस में तूफान
10. 2025: यूरोप में जंगल की आग
Sneha Patel
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Sanket Sudhakar Mahajan
❓ ऐसे क्लाइमेट इवेंट्स की सूची बनाइए, जो पिछले महीने दुनिया भर में हुए हैं और बताइए कि उनका आपसे क्या संबंध है?
👉🏽
🔸भारत और नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन
🔸पूर्वोत्तर अमेरिका में शक्तिशाली तूफान
🔸नेपाल-तिब्बत सीमा पर फ्लैश फ्लड
इन घटनाओ का सीधा संबंध मुझ से हैं और इसका प्रभाव मेरे जीवन पर बढती गर्मी और अनियमित मौसम के रूप में पडेगा |
Vandana Telagi
In East Antartica, this very same chain reaction led to the formation of 700 billion tonnes of snow.
SINKU KUMARI
पिछले महीने के क्लाइमेंट इवेंट्स
पश्चिमी यूरोप में हीट वेब
नेपाल में ग्लेशियर का टुटना
भारत के उत्तरी राज्यो में बाढ़ व तटीय राज्यों में चक्रवात तुफान और भारी वर्षा दर्जा की गई ।
Sheetal Kushwaha
पिछले महीने के क्लाइमेट इवेंट्स-------
🌱भारत के कई राज्यों में बाढ़ जैसे समस्या सामने आई है।
🌱दक्षिण अफ्रीका में अत्यधिक गर्मी देखने को मिली है
🌱नेपाल में ग्लेशियर टूटा है।
हमारा इसे संबंध कुछ ऐसा है कि यह हमारी ही करतूत का result दिख रहा है जो हम करते हैं वही हम अपने सामने देखते हैं क्लाइमेट चेंज के रूप में। तो जब तक हम अपने सुख सुविधाओं के लिए पेड़ पौधों को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते रहेंगे तब तक यह समस्याएं हमें देखने को मिलती ही रहेंगी।
Sumit Gupta
अभी पांच दिन पहले मेरे गांव में आंधी आई बारिश हुई उससे लगभग सारी फैसला नुकसान हुआ कई वृक्ष टूट गए ये हर साल हो रहा है और बढ़ आई हुई है लेकिन क्लाइमेट की बात करो तो कोई मानने को तैयार नहीं है 🙏🙏🙏
Nitesh Kumar
अपने अंदर की अपूर्णता/व्यर्थ की इच्छा/कमाना को हम(अहम्) ऐसे चीजों से भरता है, जो कभी भी पूर्ण नहीं हो सकता,क्योंकि पृथ्वी पर संसाधन सीमित है और इच्छाएं अनेक, जिससे अंततः अपूर्णता ही हाथ लगती है और अंततः दुख ही होती है और ग्लेशियर पिघलने,क्लाइमेट चेंज जैसी समस्या देखने को मिलती है।
Kaveri
Climate events occurred around the world in the past month :
🌊 India & Nepal — floods and landslides: Heavy rainfall caused severe flooding and landslides. In late September, 56 people were reported dead in Uttar Pradesh and 14 in Nepal, with major infrastructure damage.
🏔️ Himalayas — rapid warming & disasters: Scientists reported that rapid warming is increasing risks from cascading hazards such as rock/ice avalanches, debris floods and landslides in the Himalayas.
🔥 Europe — extreme wildfire season: By the end of September, about 680,000 hectares had burned across Europe, making 2026 one of the continent's most severe fire seasons on record.
🌊 Pacific — exceptional tropical-storm activity: September saw unusually intense Pacific storm activity, associated with an exceptionally strong El Niño; several Category 5 storms formed. �
🌧️ India — uneven monsoon: Early September rainfall was 26% below normal nationally, raising concerns about agriculture and water availability even as some regions experienced destructive flooding.
🌡️ Global ocean warming: Scientists reported exceptionally warm ocean conditions around Europe and the Mediterranean, contributing to marine and climate stresses.
I want more and more (convenience and comfort )
⬇️
I consume more goods, energy and services
⬇️
companies produce and transport more
more resources and energy are used
⬇️
emissions and environmental pressure increase
⬇️
society collectively alters the climate
⬇️
extreme events become more likely and intense
⬇️
those changes eventually affect my food, water, electricity, health, transport and money.
So collectively it is becomes one cycle and now the question is not remains only to what I consumed , Is goes further to Why I am consuming and is it really the necessity to consume.
And this address the actor, the doer not the action. The actor who constantly feel incomplete and in the search of completing ,fulfilling we try to fill the ego with external things which leads to destruction of mother Nature.
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Sanjana Sharma
भारत में कई राज्यों में बाढ़ और ग्लेशियरों का पिघलना, दक्षिण अमेरिका में असाधारण तापमान, प्रशांत महासागर में बहुत मजबूत एल नीनो देखा गया है जो अगले वर्ष के तापमान और बारिश को प्रभावित करेगा । इसका हमसे ये संबंध है कि इन सारे क्लाइमेट इवेंट्स का कारण "हमार अंधाधुंध उपभोग हैं।"
Raka Devi
• सितंबर के अंत में नेपाल इस आपदा में 1,490 से अधिक लोगों की जान चली गई और हजारों लोग लापता हो गए। नेपाल के मुस्टैंग जिले और हिमालयी क्षेत्रों में इस क्लाइमेट इवेंट का सबसे गंभीर असर देखा गया।
• इंडोनेशिया सुलावेसी द्वीप पर मूसलाधार बारिश के बाद एक साथ बाढ़ और भूस्खलन भारी मात्रा में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और लोग विस्थापित हुए।
• भारत में सितंबर के आखिर में देश के 23 राज्यों में भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं जबकि पश्चिमी राजस्थान से मानसून की विदाई अपने सामान्य समय से देरी से हुई।
2. यूरोप और अमेरिका में रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव और सूखा
अत्यधिक गर्मी और लू के कारण यूरोप में स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात बन गए।
• इस भीषण गर्मी का असर स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों पर भी पड़ा, जहां हीटवेव के कारण केवल कुछ ही समय में ग्लेशियरों की 5% बर्फ पिघल गई, जिसे वैज्ञानिकों ने 'पिघलने की दर में विस्फोट'कहा है।
3. अटलांटिक और प्रशांत महासागर में चक्रवात
सितंबर के महीने में प्रशांत महासागर में उठा हरिकेन पोलो एक अत्यंत खतरनाक कैटेगरी 5 का मेजर हरिकेन बना, जिसने अपनी तीव्र हवाओं और तूफानी लहरों से तटीय क्षेत्रों में बड़ा खतरा पैदा किया।
• अल नीनो के अजीब प्रभावों के चलते सितंबर की शुरुआत तक अटलांटिक महासागर में तूफानों की शुरुआत रिकॉर्ड स्तर पर बेहद धीमी रही।
4. दक्षिण अमेरिका में सूखा और जंगलों की आग ।
• ब्राजील और पराग्वे जैंसें देशों में अल नीनो के कारण ऐतिहासिक सूखे की स्थिति बनी रही, जिससे अमेज़न के जंगलों और आसपास के क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ीं, और कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
इसमें महंगाई, बीमारी,मानसिक तनाव,बिजली की किल्लत,रोजगार का संकट,स्वच्छ हवा पानी,यातायात प्रभावित हुआ।
Sarbeswar Raut
ये चीज हर जगह हो रहा है इसमें हम कुछ नहीं कर सकते हैं तो हम पेड़ लगा सकते हैं और अभी दिवाली आ रहा है हम पथका फोड़ना तो बंद कर ही सकते हैं, ये तो हमारे समुदाय के हाथ में है, हम तो इतना छोटा सा कदम से शुरुआत कर सकते हैं है
Saty
NEPAL Glacier break creates massive problem
drought many part and flood many area
which also many place
BHAVIN PATEL
१ नेपाल मैं गलेशियर पिघलने से आई बाढ़
२ यूरोप मै आई हिटवेव
३ मुंबई,गुजरात,असम और बिहार मै आई बाढ़
४ भारत के ज्यादातर हिस्सों में कम बारिश
यह सब इवेंट्स हमारी कामना पूर्ति का ही परिणाम है। हमारी कामना पूर्ति के लिए प्रकृति का उपभोग जो पृथ्वी के वातावरण को बिगाड़ रहा है।
Nibha kumari
अभी हाल ही में नेपाल में ग्लेशियर के टूटने से बहुत नुकसान हुआ है ये कोई प्राकृतिक आपदा नहीं थी यह मानव की अंधाधुन उपभोग , बढ़ती आबादी और मनुष्य का प्राकृतिक के साथ छेड़छाड़ का परिणाम है
SHIV PRATAP SINGH
तिब्बत और नेपाल में ग्लेशियर टूट जाने से हुआ भूस्खलन और भारत के पूर्वोत्तर के राज्यों में आई बाढ़ ये जलवायु से जुड़ी घटनायें है और इनका हमसे यही संबंध है कि ये सब प्राकृतिक नहीं है ये सब हमारे अहंकारजनित लगातार बढ़ते हुये भोगवाद के कारण हुई है । धरती का बढ़ता हुआ तापमान और लाखों वर्ग पुराने हिमनदों का पिघलना ये सब मानवजनित है ।
KULDEEP YADAV
1. नेपाल और तिब्बत सीमा पर आयी बाढ़। जिससे भूस्खलन और एवलांच की घटना बढ़ गई।
2. स्विट्ज़रलैंड के ग्लेशियरों ने भयंकर गर्मी और हिटवेव के प्रभाव के कारण लगभग 5%हिस्सा एक बार फिर खो दिया।
3. यूरोप और कनाड़ा के कई हिस्सों में इस ग्रीष्मकाल और उसके बाद के हफ्तों में जंगलों में भीषण आग की घटनाएं जारी रहीं।
4.
अगस्त सितंबर 2026का वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर पर बना रहा, और कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा के अनुसार वैश्विक तापमान लगातार सामान्य से काफ़ी ऊपर दर्ज किया जा रहा हैं।
Darshana
🔸भारत और नेपाल में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन
25–27 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश में सामान्य से बहुत अधिक बारिश हुई। भारत में 56 लोगों की मृत्यु हुई और नेपाल में 14 लोगों की जान गई तथा कई लोग लापता हुए। नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ा।
हमसे संबंध: भारत में रहने के कारण इसका सीधा संबंध हमारी खेती, खाद्य आपूर्ति, सड़क, घरों और जनजीवन से है। हिमालयी क्षेत्रों में भूमि उपयोग, जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझना भी जरूरी है।
🔸थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में बाढ़
26 सितंबर 2026
बैंकॉक में 48 घंटों में लगभग 300 मिलीमीटर बारिश हुई। कई सड़कें पानी में डूब गईं और कुछ इलाकों में लोगों को कमर तक पानी से होकर गुजरना पड़ा। प्रशासन ने आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित कर राहत व्यवस्था शुरू की।
हमसे संबंध: तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जल निकासी की कमी और अत्यधिक वर्षा का मेल बड़े शहरों को असुरक्षित बना सकता है। भारत के अहमदाबाद, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों के लिए भी यह एक महत्त्वपूर्ण सबक है।
निष्कर्ष
जलवायु संबंधी घटनाएँ हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि मनुष्य और प्रकृति का संबंध कैसा होना चाहिए। हम प्रकृति से अलग नहीं हैं। हमारी जीवनशैली, ऊर्जा का उपयोग, उपभोग की आदतें और विकास का मॉडल पूरी पृथ्वी की जलवायु को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए जलवायु संकट का समाधान केवल आपदाओं के बाद राहत पहुँचाना नहीं है, बल्कि उन मानवीय गतिविधियों और व्यवस्थाओं पर भी विचार करना है जो इस संकट को बढ़ाती हैं।
rockhazel
A conventional soyabean crop in India is heavily exposed to glyphosate based pesticides and herbicides
Glyphosate- based herbicides are widely used in agriculture India, despite glyphosate being banned in many parts of the Western World.
Glyphosate has been classified as probable carcinogen and is considered a potential cause of Cancer in humans, with concerns also regarding pregnancy-related health impacts and potential effects on infant growth and development
This raises concerns about potential presence of glyphosate in Indian soy products ( tofu, soy chunks, soy flour, soy milk etc.)
When life matters, so does protecting it. When you find a reason to stay, you start becoming more careful -- even what you place into your mouth begins to deserve s second thought
✍🏻 पोस्ट 8 | 1 अक्टूबर '26 💭 विषय — पर्यावरण और जलवायु ──────────── 🧊 स्विट्ज़रलैंड के…