
Nitesh Kumar
अपने अंदर की अपूर्णता/व्यर्थ की इच्छा/कमाना को हम(अहम्) ऐसे चीजों से भरता है, जो कभी भी पूर्ण नहीं हो सकता,क्योंकि पृथ्वी पर संसाधन सीमित है और इच्छाएं अनेक, जिससे अंततः अपूर्णता ही हाथ लगती है और अंततः दुख ही होती है और ग्लेशियर पिघलने,क्लाइमेट चेंज जैसी समस्या देखने को मिलती है।















