
✍🏻 पोस्ट 23 | 19 अक्टूबर '26 💭 विषय — मानव उत्कृष्टता ──────────── 🏔️ जब एक भारतीय गणितज्ञ ने पहली बार मापी दुनिया की सबसे ऊँची चोटी की ऊँचाई! 🌍 माउंट एवरेस्ट दुनिया की सबसे ऊँची चोटी है। लेकिन इसकी ऊँचाई निर्धारित करने में एक भारतीय गणितज्ञ की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी, जिनका नाम आज भी बहुत कम लोग जानते हैं। वे थे राधानाथ सिकदर। 📐 बिना पहाड़ पर चढ़े उसकी ऊँचाई मापने का कमाल! 📚 1813 में कलकत्ता में जन्मे सिकदर गणित में असाधारण प्रतिभा रखते थे। विद्यार्थी रहते हुए ही उन्होंने दो वृत्तों की उभयनिष्ठ स्पर्शरेखा खींचने की एक नई विधि विकसित की, जो 1831 में एक वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुई। ✨ उसी वर्ष, लगभग 18 वर्ष की उम्र में, वे Great Trigonometrical Survey से जुड़ गए। उस समय न कंप्यूटर थे, न GPS और न ही आधुनिक उपग्रह। विशाल भूभाग की माप के लिए गणित, दूरबीन और वर्षों के प्रेक्षणों पर निर्भर रहना पड़ता था। 🔭 आखिर उन्होंने पहाड़ की ऊँचाई मापी कैसे? 🌿 सर्वेक्षक दूर स्थित स्थानों से थियोडोलाइट नामक उपकरण की मदद से पर्वत की चोटी को देखते और क्षितिज के सापेक्ष उसका कोण मापते थे। दो ज्ञात स्थानों के बीच की दूरी और अलग-अलग स्थानों से मिले कोणों की सहायता से त्रिकोणमिति द्वारा चोटी की दूरी और ऊँचाई निकाली जा सकती थी। इसमें पृथ्वी की वक्रता और वायुमंडलीय अपवर्तन जैसे प्रभावों का सुधार भी आवश्यक था। यह केवल उपकरण चलाने का काम नहीं था। प्रेक्षणों में छोटी-सी त्रुटि भी परिणाम बदल सकती थी। सटीक गणना, धैर्य और गणितीय सूझबूझ की आवश्यकता थी। 📊 1851 में सिकदर सर्वेक्षण विभाग में Chief Computer बने। 1852 में उन्होंने Peak XV के प्रेक्षणों का विश्लेषण करके निष्कर्ष निकाला कि यह दुनिया की सबसे ऊँची ज्ञात चोटी है। यही चोटी आगे चलकर माउंट एवरेस्ट कहलाई। लेकिन चोटी का नाम ब्रिटिश सर्वेयर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर रखा गया, जबकि उसकी ऊँचाई निर्धारित करने में सिकदर का महत्त्वपूर्ण योगदान था। 🌦️ उनका योगदान केवल हिमालय तक सीमित नहीं था। मौसम संबंधी मापों और बैरोमीटर के प्रेक्षणों में तापमान के प्रभाव को सुधारने जैसे वैज्ञानिक कार्यों में भी उन्होंने योगदान दिया। 🪞 लेकिन इस कहानी का संबंध हमारे जीवन से भी है। ✍️ हम अक्सर किसी की योग्यता का आकलन उसके पद, प्रसिद्धि और सामाजिक पहचान से करते हैं। नाम बड़ा हो, तो काम भी बड़ा दिखाई देता है; नाम अपरिचित हो, तो असाधारण योगदान भी अनदेखा रह जाता है। यहीं स्वयं को देखने की जरूरत है। क्या हम किसी के काम का महत्त्व उसकी वास्तविकता देखकर तय करते हैं, या दुनिया से मिली मान्यता के आधार पर? 🍀 जब दूसरों की स्वीकृति हमारी कसौटी बन जाती है, तब हम भी काम से अधिक उसके साथ मिलने वाली पहचान को महत्त्व देने लगते हैं। राधानाथ सिकदर की कहानी हमें अपने इसी दृष्टिकोण पर प्रश्न उठाने का अवसर देती है। 💭 आपके लिए किसी इंसान के महत्त्व का आधार क्या है उसका वास्तविक योगदान या दुनिया से मिली पहचान? कमेंट में बताइए। 🔗 स्रोत: https://en.wikipedia.org/wiki/Radhanath_Sikdar https://madrascourier.com/biography/radhanath-sikdar-the-mathematician-who-calculated-the-height-of-mount-everest/













































