
Sandhya
दुनिया से मिली पहचान है इंसान कम क्या करता है ये तो बाद में देखा जाता है पहले तो ये कितने बड़े वैज्ञानिक है मै भी बड़े होके ऐसी बनूंगी लेकिन क्यों बनना है और कैसे ये कभी सोच नहीं बस खयाली पक्व पकाए है मैने खूब । जीवन नाले जैसा है पता ही गोता लगाते समय भी बुरा लगता है पता है पर क्या रोकता है ये पता नहीं चला अब लगता है हिम्मत की कभी है नहीं जान की कमी है मैने पढ़ाई खूब की है लेकिन जिनको मैनिपुलेशन आता है मै वहा फाश जाती हु क्योंकि खुद का कैरेक्टर ऐसा है जो बार बार मुर्ख बनने में मजा आ रहा है


















