
मुझे गीता से क्या मिला, गीता जीवन में उतरने के बाद जीवन में क्या परिवर्तन हुआ.. पूरी बात पढ़ें!! गीता के छात्र हैं ना हम! धर्म युद्ध कुरुक्षेत्र में भी था, आज भी है, तो हमें योद्धा होना है। और उसके लिए युद्ध कौशल तो चाहिए ही, साथ ही शरीर की मज़बूती भी बहुत आवश्यक है। और गीता तो किसी अर्जुन के लिए ही होती है। और ईमानदारी से अवलोकन करने पर पता चलता है कि मैं अर्जुन जैसा तो नहीं ही हूँ। अर्जुन को महाबाहो कहा गया है, मतलब जिनकी भुजाएँ अत्यंत शक्तिशाली हो। हमें ख़ुद से पूछना होगा: हमारी हैं क्या? अर्जुन को "धनंजय कहा" गया है, मतलब जिसने अत्यधिक धन-संपत्ति अर्जित किया हो। पर हमने तो किया नहीं! कम से कम इतना तो नहीं ही किया है कि पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर हो सकें और संस्था को भी योगदान दे सकें। अर्जुन को गुड़ाकेश भी कहा गया है। गुड़ा मतलब निद्रा। तो जिसने निद्रा को जीत लिया हो वो अर्जुन। खासकर हमें परीक्षा या सत्रों के समय नींद तो आ ही जाती है। तो हमने अगर इतना भी नहीं कर रहे तो गीता कैसे उतरेगी हमारे ऊपर। और गीता नहीं उतरेगी तो "युद्धयस्व" कैसे होगा?? असली प्रश्न तो यही है ना!! व्यक्तिगत तौर पर गीता सत्रों के बाद मैंने जितना बाहर की तरफ जो प्रयास किए हैं या यूँ अर्थ में कह सकता हूँ कि युद्ध कौशल सीख रहा हूँ। 1. अलग अलग भाषाएँ सीख रहा हूँ। ( Russian aur Japanese साथ में 😄, दोनों बिल्कुल अलग भाषाएँ हैं) इन्हें साथ में करने के लिए बौद्धिक क्षमता का बहुत विकास होता है। 2. जब तक कालेज में था, तो शारीरिक मजबूती के लिए दौड़ता था। swimming भी कॉलेज में सीखा(freestyle, breaststroke, backstroke, aur butterfly stroke) चारों आते हैं। 50m freestyle to 55 सेकंड्स में किया भी है। 1 दिन में 700-800m swimming करता था। अभी भी दौड़ता हूँ। तो शारीरिक मजबूती में कहीं से पीछे नहीं हूँ। 3. कॉलेज में 7 सेमेस्टर्स बिना किसी arrear के clear करने के बाद 8वें सेमेस्टर में GATE EXAM भी AIR 22 के साथ क्लियर किया। विषय था NAVAL ARCHITECTURE AND MARINE ENGINEERING. मैंने BTech भी MARINE ENGINEERING में ही किया है। 4. अभी घर पर हूँ, तो सत्रों को और अच्छे से सुन पाता हूँ, रिकॉर्डिंग सुनता हूँ, परीक्षा देता हूँ। 5. शास्त्रीय संगीत गायन में प्रभाकर हूँ(6 साल शिक्षा ली है). स्वरों को अच्छे से समझता हूं। अब बाँसुरी भी बजाना सीख रहा हूँ(जिससे मेरी साँस की समस्या भी ख़त्म हो गई है। पहले साँस अटक जाती थी, रात को सो नहीं पाता था, अब नहीं) साथ ही मम्मी को भी हारमोनियम सिखा रहा हूँ। अब bookstall पर भी जा रहा हूँ। अलग अलग लोगों से जा कर बात करता हूं। लोगों तक किताबें पहुँचता हूँ। सारा दिन कैसे बीत जाता है पता ही नहीं चलता। गीता तो जीवन में उतरी है। युद्ध का शंखनाद तो कर दिया है!! याचना नहीं, अब रण होगा!! आचार्य जी आपसे नया जीवन मिला है। आपका आभार🙏🙏❤️ प्रणाम!






























