
✍🏻 पोस्ट 1 | 6 अक्टूबर '26 💭 विषय — ग्लोबल करंट अफ़ेयर्स ────────── 📚 शिक्षक कम पड़ रहे हैं, या शिक्षक होने की समझ? 5 अक्टूबर, को विश्व शिक्षक दिवस मनाया जाता है। लेकिन इस बार सवाल सिर्फ शिक्षकों को सम्मान देने का नहीं, बल्कि यह देखने का है कि दुनिया के पास बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक हैं भी या नहीं। 🌍 UNESCO के अनुसार, 2030 तक दुनिया को 4.4 करोड़ अतिरिक्त प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों की जरूरत होगी। अकेले उप-सहारा अफ्रीका को करीब 1.5 करोड़ और दक्षिण एशिया को 78 लाख अतिरिक्त शिक्षक चाहिए। और समस्या सिर्फ नए शिक्षक खोजने की नहीं है। OECD की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में OECD देशों के 6.4% योग्य प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक पेशे से बाहर हो गए। 🇮🇳 भारत की स्थिति को दूसरे देशों से देखें तो तस्वीर और स्पष्ट होती है। OECD Education at a Glance 2026 के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर भारत में एक शिक्षक पर 27 विद्यार्थी हैं। तुलना में ब्राज़ील में 22, मेक्सिको में 23 और दक्षिण अफ्रीका में 26 विद्यार्थी प्रति शिक्षक हैं। OECD औसत लगभग 14 विद्यार्थी प्रति शिक्षक है। यानी भारत में एक शिक्षक के सामने OECD औसत की तुलना में लगभग दोगुने विद्यार्थी हैं। 📊 UDISE+ 2025-26 के अनुसार भारत में 24.72 करोड़ विद्यार्थी, 14.67 लाख स्कूल और करीब 1.03 करोड़ शिक्षक हैं। कुल विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात 24:1 है। लेकिन संख्या पूरी कहानी नहीं बताती। 📖 ASER 2024 के अनुसार, ग्रामीण भारत में कक्षा 5 के सरकारी स्कूलों के 44.8% बच्चे ही कक्षा 2 के स्तर का पाठ पढ़ पा रहे थे, जबकि निजी स्कूलों में यह आंकड़ा 59.3% था। हालांकि सरकारी स्कूलों में यह 2022 के 38.5% से सुधरा है। 📊 SchoolTELLS survey Learning Curve – Issue XIV: Mathematics2010 के अनुसार, सिर्फ 25% शिक्षक बुनियादी प्रतिशत का सवाल सही कर पाए और केवल 28% शिक्षक क्षेत्रफल का सवाल सही कर पाए। एक अन्य सर्वे के अनुसार, बिहार के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले नियमित शिक्षकों में भी प्रतिशत का सवाल सही करने वालों का अनुपात केवल 43% था। 🪞 यहीं से एक और सवाल सामने आता है। शिक्षक होना आखिर किसलिए है? एक शिक्षण में शिक्षक को केवल नौकरी या पेशे की भूमिका तक सीमित न देखकर, विद्यार्थियों को अपने साथ आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी के रूप में देखने की बात कही गई है। क्योंकि शिक्षक के सामने केवल विद्यार्थी बैठे हों, इतना काफी नहीं। सवाल यह है कि क्या शिक्षक खुद सीखने और विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने की नीयत से पढ़ा रहा है? 🌱 दुनिया को करोड़ों नए शिक्षक चाहिए। भारत में भी शिक्षक और विद्यार्थियों की संख्या का अंतर अपनी चुनौती दिखा रहा है। लेकिन शायद सबसे जरूरी सवाल संख्या से आगे का है: ❓ अगर एक कक्षा में शिक्षक भी है और विद्यार्थी भी, तो क्या केवल पाठ पूरा हो जाना शिक्षा है, या शिक्षक का होना विद्यार्थी के सीखने की दिशा को देखने से जुड़ा है? 🔗 स्रोत: Indian Express https://indianexpress.com/article/education/world-teachers-day-unesco-ilo-observation-oecd-pupil-teacher-ratio-more-students-less-teaching-staff-sbi-research-udise-10906887/lite/ UNESCO https://www.unesco.org/en/education OECD https://www.oecd.org/en/publications/2026/09/education-at-a-glance-2026_3bce4131.html ASER https://asercentre.org/aser-2024/















































