
उपर में जितने भी आंकड़े दिए गए हैं उसके अनुसार तो शिक्षा के क्षेत्र में और सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। लेकिन साथ ही हमे ये भी समझना होगा कि शिक्षा के क्षेत्र में हमे maas based education लाने की सबसे ज्यादा जरूरत है। खासकर भारत जैसे देश में। क्योंकि यहां जितने भी भर्ती और शिक्षक की या किसी और भी तरह का भर्ती निकलता है, कितने साल लग जाते हैं उसने परिणाम आने में, उसमें उम्र खत्म हो गया। उसके बाद पता चलता है कि पेपर लीक हो गया तो एग्जाम कैंसल हो जाता है। बहुत तरह से मामला उलझ जाता है। जिसमें कितने ही अभ्यर्थियों का प्रयास और मेहनत और परीक्षा में बैठने के तय नियम भी खत्म हो जाते हैं। अगर सब चीज अच्छे से कानूनी तौर पर और नियम के हिसाब से चलता तो आज हर घर में एक शिक्षक होता। और कम उम्र के बच्चे, जिनको पढ़ना चाहिए खेलना चाहिए, वो चाय के दुकान में किराने की दुकान में अपने मालिक की गालिया सुनकर काम करता है। और उससे भी ज्यादा बड़ी गलती मा बाप करते हैं कि वो अपने बच्चों को भीख मांगने के लिए बोलते हैं, या फिर कोई और काम करने के लिए। तो हमारे देश में किसी चीज की कमी है इसका मतलब ये नहीं कि वो चीज सच मे हमारे पास नहीं है। हमारे पास जितनी सुविधाएं और संसाधन है उससे तो पूरे अंग्रेज अपना जीवन जीकर चले गये। और अभी है भी तो नेता मंत्री ओर बाकी सभी अपना अधिकार जमाए हुए बैठे हैं। मै भी बच्चों को होम ट्यूशन पढाता हूं, जब कोरोना महामारी आया है तो उसी समय से मै बच्चों को पढाना शुरू किया था। तब से अभी तक मै 2 , 4 बच्चों को पढ़ाता हूं। कभी वो अपने parents के साथ चले गए तो कभी उनका ट्रांसफर कही और हो गया। तो इस तरह से जब एक शिक्षक अपने आप को देखकर मूल प्रश्न पूछना शुरू कर देते हैं तो जब उनके जीवन में changes आए तो उससे बच्चों को पढ़ाने में भी बदलाव आते हैं।


















