
✍🏻 पोस्ट 2 | 21 सितंबर '26 💭 विषय — लोकधर्म ───────── 🗣️ गाली में स्त्री क्यों आती है? हमारे रोज़मर्रा के बोलचाल में गाली कई बार इतनी सामान्य हो जाती है कि हम यह देखना ही छोड़ देते हैं कि हम कह क्या रहे हैं। 😶 गुस्सा आया, गाली। दोस्त से मज़ाक किया, गाली। किसी को नीचा दिखाना है, गाली। कभी-कभी तो गाली वाक्य का हिस्सा नहीं, वाक्य की जगह लेने लगती है। 🔎 लेकिन यहाँ एक जरूरी बात है। यह मान लेना सही नहीं होगा कि गाली देने वाला व्यक्ति हमेशा कम शब्द जानता है। शोध में ऐसा सीधा संबंध नहीं मिला है। एक अध्ययन में गाली और दूसरे शब्दों की अभिव्यक्ति के बीच सकारात्मक संबंध पाया गया। यानी गाली देना अपने-आप में कम शब्दावली का प्रमाण नहीं है। 💭 फिर सवाल बदल जाता है। अगर शब्द हमारे पास हैं, तो हर भावना के लिए वही कुछ गालियाँ क्यों? यहीं से भाषा से ज्यादा हमारी नीयत दिखाई देने लगती है। 👁️ खासकर तब, जब किसी पुरुष से झगड़ा हो और उसकी माँ, बहन या किसी स्त्री के शरीर को अपमान का साधन बना दिया जाए। जिस स्त्री का उस विवाद से कोई लेना-देना नहीं, उसे बीच में लाकर हम आखिर क्या कर रहे हैं? ⚖️ भाषा केवल सूचना देने का माध्यम नहीं होती। शब्द रिश्तों, ताकत और सामाजिक धारणाओं को भी दिखाते हैं। भाषा पर हुए शोध में यह देखा गया है कि स्त्री को नीचा दिखाने वाली यौन भाषा केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं होती, वह समाज में मौजूद लैंगिक धारणाओं को भी मजबूत कर सकती है। 🪞 इसलिए सवाल केवल यह नहीं है कि “मैं गाली क्यों दे रहा हूँ?” सवाल यह भी है कि “मेरी गाली में किसी स्त्री का शरीर क्यों आ रहा है?” 📖 शायद यहाँ हमारा अपना बहीखाता खुलता है। सामने वाले ने मुझे अपमानित किया, इसलिए मुझे उसे छोटा करना है। उसने मुझे चोट पहुँचाई, इसलिए अब मेरी बारी है। अहंकार हिसाब बराबर करना चाहता है, और भाषा उसका हथियार बन जाती है। ❓ लेकिन एक क्षण रुककर देखिए: जिस व्यक्ति से मेरा विवाद है, उसे छोटा करने के लिए मुझे किसी स्त्री को बीच में लाने की जरूरत क्यों पड़ती है? 🪞 और अगली बार गाली मुँह तक आए तो सवाल यह नहीं कि सामने वाला कितना गलत है। सवाल यह है: “मुझे सच में कुछ कहना है, या अहंकार बस किसी को छोटा करके अपना बहीखाता बराबर करना चाहता है?” 📌 स्रोत: https://app.acharyaprashant.org/?id=8-ec46531f-e0c2-4841-ba1e-bfb6969f98c7&cmId=m00076 https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S038800011400151X https://www.cambridge.org/core/journals/language-in-society/article/abs/sluttified-sex-verbal-misogyny-reflects-and-reinforces-gender-order-in-wireless-china/46E9271AC67E1418F5705BF84E38B370















































