
हमारे जीवन में महिला विरोधी शब्द इस कदर शामिल हो गए हैं की कोई भी बात करो चाहे वह हंसी - मजाक हो या कोई सामान्य मुद्दे पर बातचीत चल रही हो तब तक उनका वाक्य पूरा नहीं होता जब वे महिला विरोधी शब्दों को अपने वाक्यों में शामिल न करें। हर बात में महिला विरोधी शब्दों का प्रयोग करते हैं। मैंने तो ऐसे - ऐसे लोगों को बोलते हुए सुना है जो समाज के आदर्श माने जाते हैं । सबसे ज्यादा आश्चर्य तो मुझे तब होता है जब महिलाएं ही इन महिला विरोधी शब्दों का प्रयोग करती है । जो भी महिला विरोधी शब्दों का उपयोग करता है मै सबसे कहना चाहूंगी आप महिलाओं को शरीर के तौर पर देखना बंद कर दीजिए इंसान के तौर पर देखिए। और सभी महिलाओं से भी कहना चाहूंगी की अपनी चेतना को इतना मजबूत रखिए कैसी भी बुराई हो विरोध करना है जैसा की आचार्य जी कहते हैं कि यह सर झुकेगा तो हमेशा सत्य के लिए घटियापन की इस जीवन में कोई जगह नहीं रहेगी।


















